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वट सावित्री पूजा कल, कोरोना काल में मास्क भी बनेगा महिलाओं का श्रृंगार सामग्री




लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सावित्री का व्रत किया जाता है. सुहागिन महिलाएं कल शुक्रवार को वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना करेगी. जबकि आज गुरूवार को महिलाएं स्नान-ध्यान कर पूजा अर्चना के बाद अरवा भोजन किया. इसके पूर्व घर में नाना प्रकार का पकवान भी तैयार किया गया और साथ ही हाथों में मेंहदी भी रचाई गईं.

ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री इस व्रत को करती हैं, उसका सुहाग अमर हो जाता है. कहा जाता है कि जिस तरह से सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से बचा लिया था, उसी प्रकार से इस व्रत को करने वाली स्त्री के पति पर आने वाल हर संकट दूर हो जाता है. इस व्रत के दिन स्त्रियाँ वट (बरगद) वृक्ष के नीचे सोलह श्रृंगार कर आभूषण से सुसज्जित होकर सावित्री-सत्यवान का पूजन करती हैं. इस कारण से ही व्रत का नाम वट-सावित्री के रूप में जाना जाता है. इस व्रत का उल्लेख स्कंद पुराण, भविष्योत्तर पुराण तथा निर्णयामृत आदि में भी किया गया है. धर्मिक ग्रंथ के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा (जड़), विष्णु (तना) एवं महेश (पत्ते) में विराजमान रहते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर पूजन, व्रत आदि करने तथा कथा सुनने से मनवांछित फल मिलता है.

वट सावित्री पूजन विधि

व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान करके एक दुल्हन की तरह सजकर एक थाली में गुड़,भींगे हुए चने, आटे से बनी हुई पकवान, पांच प्रकार का फल जैसे प्रसाद सहित कुमकुम, रोली, मोली, पान का पत्ता, धुप, घी का दीया, लोटे में जल और हाथ का पंखा लेकर बरगद पेड़ के नीचे जातीं हैं. जहां पेड़ की जड़ में जल व प्रसाद चढाकर धूप व दीपक जलाया जाता हैं. जिसके उपरांत सच्चे मन से पूजा करते हुए अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है. साथ ही पंखे से वट वृक्ष को हवा दी जाती है. इसके पश्चात् बरगद के पेड़ के चारों ओर घूमकर कच्चे धागे या मोली को 7 बार बांधकर प्रार्थना की जाती है. परिक्रमा के बाद सवित्री एवं सत्यवान की कथा सुनी जाती है. जिसके उपरांत घर आकर जल से अपने पति के चरण धोकर व्रत करने वाली महिला आशीर्वाद लेती हैं.

इस वर्ष मास्क भी बनेगा महिलाओं का श्रृंगार सामग्री

कोरोना को लेकर लॉकडाउन के बीच इस वर्ष वट सावित्री पूजा का आयोजन होना है. ऐसे में व्रत करने वाली अलका मिश्रा और सुधा भूषण कहतीं हैं कि पूजा के दौरान वे ना सिर्फ सोशल डिस्टेंस का पालन करेंगीं बल्कि मास्क व सैनिटाइजर का भी उपयोग करना नहीं भूलेंगीं. साथ ही उन्होंने व्रत करने वाली अन्य महिलाओं से भी पूजा के दौरान सोशल डिस्टेंस का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना काल में इस वर्ष मास्क भी महिलाओं के श्रृंगार सामग्री में शामिल होगा.

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