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…तो इसलिए खास है बसंत ऋतु और बसंत पंचमी

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : “जब खेतों में सरसों फूली हो, आम की डाली बौर से झूली हो । जब पतंगें आसमां में लहराती हैं, मौसम में मादकता छा जाती है । तो रुत प्यार की आ जाती है, जो बसंत ऋतु कहलाती है”…

श्री शिव शक्ति योग पीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज का कहना है कि सिर्फ खुशगवार मौसम, खेतों में लहराती फसलें व पेड़-पौधों में फूटती नई कोपलें ही बसंत ऋतु की विशेषता नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उल्लास व प्रेम के चरमोत्कर्ष का, ज्ञान के पदार्पण का, विद्या व संगीत की देवी के प्रति समर्पण का त्यौहार भी बसंत ऋतु है. इसी दिन जगत की नीरसता को खत्म करने व समस्त प्राणियों में विद्या व संगीत का संचार करने के लिए देवी सरस्वती अवतरित हुई थीं. इसलिए इस दिन शैक्षणिक व सांस्कृतिक संस्थानों में मां सरस्वती की विशेष रुप से पूजा की जाती है और उनसे प्रार्थना की जाती है कि वे अज्ञानता का अंधेरा दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करें.

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बसंत पंचमी

माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी कहा जाता है. माना जाता है कि विद्या, बुद्धि व ज्ञान की देवी सरस्वती का आविर्भाव इसी दिन हुआ था. इसलिए यह तिथि वागीश्वरी जयंती व श्री पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है. हिंदूओं के पौराणिक ग्रंथों में भी इस दिन को बहुत ही शुभ माना गया है व हर नए काम की शुरुआत के लिए यह बहुत ही मंगलकारी माना जाता है.

बसंत पंचमी पर पौराणिक कथा

माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने श्रृष्टि की रचना तो कर दी लेकिन वे इसकी नीरसता को देखकर असंतुष्ट थे. फिर उन्होंनें अपने कमंडल से जल छिटका जिससे धरा हरी-भरी हो गई व साथ ही विद्या, बुद्धि, ज्ञान व संगीत की देवी प्रकट हुई. ब्रह्मा जी ने आदेश दिया कि इस श्रृष्टि में ज्ञान व संगीत का संचार कर जगत का उद्धार करो. तभी देवी ने वीणा के तार झंकृत किए, जिससे सभी प्राणी बोलने लगे, नदियां कलकल कर बहने लगी और हवाओं ने भी सन्नाटे को चीरता हुआ संगीत पैदा किया. तभी से बुद्धि व संगीत की देवी के रुप में सरस्वती पूजी जाने लगी. मान्यता है कि जब सरस्वती प्रकट हुई तो भगवान श्री कृष्ण को देखकर उनपर मोहित हो गई व भगवान श्री कृष्ण से पत्नी रुप में स्वीकारने का अनुरोध किया. लेकिन श्री कृष्ण ने राधा के प्रति समर्पण जताते हुए मां सरस्वती को वरदान दिया कि आज से माघ के शुक्ल पक्ष की पंचमी को समस्त विश्व तुम्हारी विद्या व ज्ञान की देवी के रुप में पूजा करेगा. उसी समय भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले देवी सरस्वती की पूजा किया और तब से लेकर निरंतर बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा लोग करते आ रहे हैं.

बसंत पंचमी है खास

•बसंत पंचमी के दिन को माता पिता अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की शुरुआत के लिए शुभ मानते हैं.

•बच्चों को उच्चारण सिखाने के लिहाज से भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है.

•6 माह पूरे कर चुके बच्चों को अन्न का पहला निवाला भी इसी दिन खिलाया जाता है.

•चूंकि बसंत ऋतु प्रेम की रुत मानी जाती है और कामदेव अपने बाण इस ऋतु में चलाते हैं. इस लिहाज से अपने परिवार के विस्तार के लिए भी यह ऋतु बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसलिए बसंत पंचमी को परिणय सूत्र में बंधने के लिए भी बहुत सौभाग्यशाली माना जाता है और बहुत से युगल इस दिन अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत करते हैं.

•गृह प्रवेश से लेकर नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी इस दिन को शुभ माना जाता है.




ऐसे करें बसंत पंचमी की पूजा

प्रात:काल स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण कर ले. मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें और तत्पश्चात कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें. फिर मां सरस्वती की पूजा करें. मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं. फिर माता का श्रृंगार कराएं, ध्यान रखें कि माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र ही पहनाएं. प्रसाद के रुप में खीर अथवा दुध से बनी मिठाईयां चढा सकते हैं और श्वेत फूल भी माता को अर्पण किये जा सकते हैं. विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम व पुस्तकों का दान करें. संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगा कर मां की आराधना करते हैं.पंडित कृष्णकांत झा ने बताया है कि विश्व विद्यालय पंचांग के मुताबिक इस वर्ष बसंत पंचमी के प्रवेश व समाप्ति की तिथि व समय निम्न हैं.

बसंत पंचमी तिथि का प्रवेश –29 जनवरी को प्रात:10:28 बजे से शूरू

बसंत पंचमी तिथि की समाप्ति– 30 जनवरी 1:06 बजे तक

संत पंचमी पूजा का शुभ अमृत मुहुर्त – 30 जनवरी प्रात: 08.00 से 10.00 तक और अभिजित मुहूर्त 11.00 से 01.00 तक

पूजा की तैयारी जोरों पर

बसंत पंचमी सरस्वती पूजा की तैयारी प्रारंभ हो चुकी हैं. सरकारी, निजी स्कूल, सार्वजनिक स्थल के साथ- साथ अपने-अपने घरों में छात्र – छात्रा विद्या की धनी मां सरस्वती की पूजन की तैयारियों को एकीकृत होकर योजना बना ली है. वहीं मूर्तिकार माँ की प्रतिमा निर्माण करने में लगे हुए हैं. सरस्वती पूजा के अवसर कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है.

मुक्ति झा का पेंटिंग चर्चाओं में

समृद्ध विरासत को अगली पीढी तक पहुंचाने का संकल्प लिए मुक्ति झा की पेंटिंग इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. माँ सरस्वती की आकर्षक तस्वीर लोगों के दिलों में समा चुकी है. यह तस्वीर सोशल मीडिया में छाया हुआ है. जो दर्शाता है कि यदि किसी व्यक्ति में नैसर्गिक प्रतिभा हो तो उसे किसी की कृपा या परिस्थिति का मोहताज होने की जरूरत नहीं पड़ती है. मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड अंतर्गत बलिया गांव की मुक्ति झा अपनी जन्मजात प्रतिभा के बल पर इस कथन को एक बार फिर सच साबित कर गईं हैं.



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