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सदर अस्पताल : चिकित्सकों की लापरवाही या फिर किसी की साजिश !

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लाइव खगड़िया : जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र सदर अस्पताल विगत दो दिनों से चर्चाओं में हैं. बहरहाल यहां की मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं को थोड़ी देर के लिए दरकिनार कर फिलवक्त उपजे ताजा हालात की चर्चा करें तो तस्वीर के दोनों ही पहलूओं पर गौर फरमान होगा. बात शनिवार की देर शाम की है जब करंट से झुलसे एक युवक को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया जाता है. जहां चिकित्सकों के द्वारा उसे मृत घोषित कर दिया जाता है. मीडिया रिपोर्ट की यदि मानें तो अस्पताल से लौटने के बाद मृतक के परिजनों को किसी ने कह दिया कि युवक जिन्दा है. जिसके बाद मृतक के परिजन  रविवार की सुबह अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हैं. जबकि आक्रोशितों द्वारा अस्पताल में जमकर बवाट काटा जाता है. ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक को भी नहीं बख्शा गया. स्थिति यहां तक पहुंच गई कि जब आक्रोशितों को नियंत्रित करने चित्रगुप्तनगर थाना की पुलिस थानाध्यक्ष प्रियरंजन के नेतृत्व में सदर अस्पताल पहुंची तो पुलिस पर भी रोड़ेबाजी शुरू कर दिया गया.




जिसके बाद सदर एसडीओ धर्मेन्द्र कुमार, सदर एसडीपीओ आलोक रंजन, नगर थानाध्यक्ष अविनाश चन्द्र समेत बड़ी संख्या में पुलिस जवान अस्पताल पहुंचे और हालात पर काबू पाया गया. इस बीच उपद्रवियों के द्वारा अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ किया गया. रोड़ेबाजी में पुलिसकर्मियों को भी चोटें आने की खबर है. दूसरी तरफ घटना के विरोध में सुरक्षा की मांग को लेकर सोमवार से सदर अस्पताल के चिकित्सक सहित अस्पतालकर्मी हड़ताल पर चले गये. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर स्वास्थ्यकर्मी अस्पताल के मुख्य गेट पर धरना पर बैठ गये हैं.

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जिससे सदर अस्पताल की ओपीडी सहित आपातकालीन सेवाएं ठप पड़ गई और इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है. अस्पताल में उपजे ताजा हालात के लिए यह देखना दीगर होगा कि सदर अस्पताल के चिकित्सकों के द्वारा युवक को मृत घोषित कर देने के बाद भी यदि वो जिन्दा था तो निश्चय ही अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगना लाजिमी है. लेकिन यदि नहीं… तो अस्पताल व चिकित्सकों की साख पर बट्टा लगाकर यहां उपद्रव मचाने की किसी साजिश की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता है. हलांकि दोनों ही पक्ष की अपनी-अपनी दलीलें हैं और यह एक जांच का मामला है. लेकिन यह भी सच है कि किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. उधर घटना के बाद से ही मृतक के परिजनों के बीच मातम पसरा हुआ है.


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