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अलर्ट : बढ़ रहा है चिकनपॉक्स का खतरा,बचाव के लिए सावधानी जरूरी




लाइव खगड़िया (हेल्थ डेस्क) : जिले के कई हिस्सों से चिकनपॉक्स यानी चेचक की बीमारी के कई मामले सामने आ रहे हैं और संक्रमण शहर से लेकर ग्रामीण इलाका तक में फैलने लगा है. वैसे भी गर्मियां अपने साथ इंफेक्शन और बीमारियां भी लेकर आती है. ऐसे में इस मौसम में सतर्क रहने की जरूरत है. चिकनपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है जो काफी पीड़ादायक होता है. एक बार संक्रमण होने पर इसका असर सात दिनों तक काफी तीव्र रहता है. साथ ही अन्य लोगों के भी संक्रमित होने की आशंका रहती है.यह हवा और खांसी के माध्यम से एक से दूसरे व्यक्ति के शरीर में फैलता है. सही समय पर इसके लक्षण को पहचान कर इलाज के माध्यम से इस रोग से बचा जा सकता है. साथ ही थोड़ी सी सावधानी से भी इन बीमारियों से दूर रहा जा सकता है. बच्चों को चिकनपॉक्स के रोगी से दूर रखना चाहिए और रोगी के पास काफी साफ-सफाई रखनी चाहिए ताकि संक्रमण फैल ना सके.

चिकनपॉक्स के लक्षण 

चिकनपॉक्स यानी चेचक Varicella Zoster नामक वायरस की वजह से होता है.

इसमें पूरे शरीर पर चकते और लाल दाने उभर आते हैं. दाने निकलने पर शरीर में खुजली होने लगती है और उससे पानी भी निकलने लगता है.

कई बार तो लाल दानें में मवाद भी पड़ जाता है और फफोले उभर आते हैं.ये फफोले 2 से 4 दिनों के अंदर पूरे शरीर पर तेजी से फैल जाता है.

कमर में तेज दर्द होता है और सीने में अजीब सी जकड़न होने लगती है.

चिकनपॉक्स की स्थिति में बुखार भी हो जाता है.साथ ही साथ भूख में कमी, सिर में दर्द और थकान की शिकायत आने लगती है.

अगर यह रोग नियंत्रित न हो तो इसका असर दिमाग व लिवर तक पहुंच सकता है.




चिकनपॉक्स का इलाज 

चिकनपॉक्स का सबसे बेहतरीन इलाज इसके इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है. डॉक्टरों के अनुसार चिकनपॉक्स की बीमारी को दूर रखने के लिए 12 से 15 महीनों की उम्र के बीच बच्चों को चिकन पॉक्स का टीका लगवाना चाहिए.इसके अलावा 4 से 6 साल की उम्र के बीच बूस्टर टीका भी जरूरी है.माना जाता है कि यह टीका चिकनपॉक्स के गंभीर संक्रमण को रोकने में 95 फीसदी कारगर होता है.हलांकि टीकाकरण के बाद भी कभी-कभी इस रोग के होने की आशंका बनी रहती है.

टीकाकरण में एतियात भी जरूरी

चिकनपॉक्स का टीका प्रेगनेंट महिलाओं और उन लोगों को नहीं लगवाना चाहिए जिन्हें जिलेटिन या फिर ऐंटीबायॉटिक नियोमाइसिन से एलर्जी है.इसके अतिरिक्त उन लोगों को भी टीकाकरण से परहेज करना चाहिए जिनका इम्यून सिस्टम बेहद कमजोर हो या फिर वे यदि एचआईवी जैसे रोग से पीड़ित हैं.

चिकनपॉक्स का होमियोपैथी में भी है प्रतिरोधक दवा

चिकनपॉक्स का होमियोपैथी में भी प्रतिरोधक दवा है.जिसे लेने से संक्रमण की संभावनाएं कम हो जाती है.साथ ही साथ लक्षण के अनुसार चिकित्सकों से होमियोपैथी की दवा लेने से काफी लाभ मिलता है.

इन आहारों से करें परहेज

चिकन पॉक्स के मरीजों को फैट फूड मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स और अंडे खाने से बचना चाहिए. पीड़ित को सिट्रस फूड यानी खट्टे फलों को खाने और उनका जूस पीने से भी बचना चाहिए.साथ ही बहुत अधिक नमक और नमकयुक्त फूड, मसालेदार फूड, चॉकलेट, पनीर-बटर, मुंगफली जैसी चीजें भी नहीं खाना चाहिए. रोसेस्ड फूड और जंकफूड के साथ ही तले हुए फूड को भी ना कहें.

खाने में इसे करें शामिल

चिकन पॉ़क्स के मरीजों को खाने में गाजर का ताजा जूस, तरबूज, किवी, नाशपती आदि जैसे भरपूर पानी वाले आहार को शामिल करना चाहिए.साथ ही दही, आइसटी और ठंडा पानी जैसी चीजें लेने से आराम मिलता है.

नीम से नहलायें

चिकन पॉक्स के दौरान शुरूआत में नहाने को नजरअंदाज करें. लेकिन तीसरे दिन के बाद पानी की बाल्टी में दो से तीन घंटे के लिए नीम की पत्तियां डाल दें और फिर इस पानी से स्नान करायें.नहाने के बाद पूरे बदन पर हल्दी या नीम का पेस्ट लगाया जा सकता है.

बरतें विशेष सावधानी

चेचक से पीड़ित रोगी के कपड़ों को धूप में ही सुखाएं और रोगी को हवादार जगह पर रखने की कोशिश करें.इसके साथ ही नींबू, नारियल व दाल के पानी का भरपूर मात्रा में दें.


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