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…जब मुकेश के जुनून की साईकिल पछाड़ दिया था मोटरगाड़ी को

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खगड़िया : कहा जाता है कि पत्रकारिता का नशा एक बार चढ जाने के बाद वो आसानी से नहीं उतरता है. फिर चाहें वक्त की बंदिशें हो या फिर लंबी दूरियां…व्यस्तम जिन्दगी में भी वक्त निकल ही जाता है और दूरियां भी सिमट ही आती है.

जिले के ऐसे ही कुछ पत्रकारों की सूची में एक नाम आता है मुकेश कुमार मिश्र का.जिन्होंने वर्ष 2004 में दैनिक हिन्दुस्तान के लिए परबत्ता प्रखंड से रिपोर्टिंग शुरू कर मीडिया जगत में कदम रखा था.इसके पूर्व वो एक पाठक के रूप में क्षेत्र की समस्याओं को पोस्टकार्ड में लिखकर अखबार के कार्यालय में निरंतर डाक से भेजा करते थे और उनकी बातों को पाठकनामा में जगह भी मिलती रही थी.क्षेत्र की समस्याओं को लेखनी के माध्यम से पटल पर रखना उन्हें मीडिया के क्षेत्र में आने को प्रेरित किया और अखबार के साथ जुड़ने के साथ उनके अरमानों को तो जैसे पंख ही लग गये.उस वक्त अररिया गांव में एक बड़ी घटना घटित होने की जानकारी मिलते ही वो लगभग 8 किलोमीटर का सफर साईकिल से ही इतनी तेजी से तय कर गये कि घटना स्थल पर वो प्रशासन की मोटर गाड़ी से पहले पहुंच गये.सक्रिय पत्रकारिता के चार सालों के उनके सफर का साईकिल ही हमसफर बना.


“अब नहीं सुनाई देती है ढोलक पर थाप की आवाज”, “शिक्षक नियोजन का हाल,एक पद पर दो बहाल”, “मधुशाला एवं पाठशाला आमने सामने” जैसी उनकी कई खबरें उस वक्त काफी सुर्खियों में रही थी.कुल्हड़िया के मैंथा की खेती पर उनके द्वारा लिखी गई एक खबर किसानों के लिए तो नया मार्ग ही खोल गया था.लेकिन वर्ष 2008 में परिस्थितियां कुछ ऐसी आई कि उन्हें दैनिक हिन्दुस्तान को अलविदा कहना पड़ा और फिर वो रोजी-ऱोटी की तालाश में प्रदेश से बाहर चले गये.आध्यात्मिक खबरों को एक नया आयाम देने वाले मुकेश दूसरे प्रदेश में रहकर भी अपनी लेखनी से फरकिया की मिट्टी की सुगंध बिखरते रहे हैं.एक स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर प्रभात खबर के बिहार,झारखंड व पश्चिम बंगाल संस्करणों में उनकी दर्जनों  स्टोरी प्रकाशित हो चुकी हैं.बहरहाल वो डिजिटल की दुनियां में न्यूज पोर्टल के माध्यम से अपनी लेखन कला में रंग भर रहे हैं.भलें ही आज मुकेश खगड़िया से कोसों दूर हों लेकिन उनकी खबरें आज भी फरकिया के बेहद खास और पास प्रतित होती है.वक्त-वेवक्त तो कई ऐसे मामले भी सामने आये हैं जब परबत्ता की हलचल की जानकारी स्थानीय लोगों को बाद में चलती है और जिले से कोसों दूर उनतक खबरें तरंग की गति से पहुंच जाती है.

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