लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिले के पसराहा थाना अंतर्गत गांधीनगर (खोरालाव) निवासी और देश के वीर सपूत नायक परमानंद सिंह का लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल (सेंट्रल कमांड) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। बुधवार को अगुवानी गंगा घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
कारगिल युद्ध में दिखाया था शौर्य
वर्ष 1969 में जन्मे मित्तन प्रसाद सिंह के पुत्र नायक परमानंद सिंह देशभक्ति, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल थे।
सेना में बहाली: वे वर्ष 1988 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे।
कारगिल में पराक्रम: वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में उन्होंने दुश्मनों के खिलाफ मोर्चे पर डटकर मुकाबला किया और अपनी वीरता से देश का मान बढ़ाया।
दुबारा देश सेवा: वर्ष 2010 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका जज्बा कम नहीं हुआ और वे डीएसी (डिफेंस सिक्योरिटी कोर) के माध्यम से दोबारा सेना से जुड़ गए। इसी वर्ष नवंबर में उनकी अंतिम सेवानिवृत्ति होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
देशभक्ति से ओत-प्रोत है पूरा परिवार
नायक परमानंद सिंह का पूरा परिवार मातृभूमि की सेवा में समर्पित है। उनके बड़े भाई अधिक लाल सिंह एवं छोटे भाई (पूर्व सूबेदार) धनिक लाल सिंह ने भावुक होकर कहा कि परमानंद जी का पूरा जीवन देश को समर्पित रहा। उनके बड़े पुत्र राजीव रंजन भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होकर पिता की विरासत को आगे बढ़ा चुके हैं, जबकि छोटे पुत्र धीरज कुमार सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं।
पैतृक गांव में उमड़ा जनसैलाब, ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ से विदाई
जैसे ही नायक परमानंद सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, ग्रामीणों, परिजनों और पूर्व सैनिकों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद ‘भारत माता के वीर सपूत अमर रहें’ के गगनभेदी नारों के बीच उनकी अंतिम शव यात्रा निकाली गई, जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए।

अगुवानी गंगा घाट पर सेना की टुकड़ी द्वारा उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इस दौरान गयासिन अकादमी से पहुंचे सूबेदार प्रेम सिंह, विकास कुमार, लांस नायक सुखजीत सिंह, गौरव कुमार, प्रशांत, हवलदार साबिर हुसैन एवं नायक सादाकीत अलयास ने अंतिम संस्कार से पूर्व सैन्य सम्मान की सभी रस्में पूरी कीं।
नायक परमानंद सिंह का निधन पूरे राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देती रहेगी।
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