लाइव खगड़िया : समाज में जहां लोग मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की रूढ़ियों से बंधे रहते हैं, वहीं पंजाब के पटियाला से आए एक पुत्र ने अपनी मां की अंतिम इच्छा पूरी कर मानवता की नई मिसाल पेश की है। ओमप्रकाश जी अपनी दिवंगत माता कांति देवी का पार्थिव शरीर एम्बुलेंस से लेकर खगड़िया स्थित श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज पहुंचे और उसे चिकित्सा शिक्षा के लिए दान कर दिया।
विरोध के बावजूद अडिग रहा बेटा

दिवंगत कांति देवी आध्यात्मिक रुचि की महिला थीं और ‘डेरा सच्चा सौदा’ के सत्संग से जुड़ी थीं। सत्संग के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने जीवित रहते ही इच्छा जताई थी कि मृत्यु के बाद उनका शरीर मिट्टी में मिलने के बजाय किसी के काम आ सके। हालांकि, इस फैसले का सगे-संबंधियों ने काफी विरोध किया, लेकिन ओमप्रकाश ने अपनी मां को दिए वचन को सर्वोपरि रखते हुए सभी विरोधों का सामना किया और देहदान का फैसला लिया।
मेडिकल कॉलेज में हुआ भव्य स्वागत
जैसे ही पार्थिव शरीर पंजाब के पात्रा (पटियाला) से मेडिकल कॉलेज पहुंचा, वहां का माहौल भावुक हो उठा। मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन डॉ. विवेकानंद, डायरेक्टर डॉ. ज्ञानभूषण और प्रबंधक डॉ. रीना कुमारी रूबी सहित सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने पूजा सामग्री के साथ पार्थिव शरीर का पूजन किया और पूरे सम्मान के साथ देहदान स्वीकार किया।
”माता जी के इस महान त्याग को देखकर मैं अत्यंत भावुक हूं। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। इस देहदान से न केवल मेडिकल छात्रों को सीखने का अवसर मिलेगा, बल्कि यह संपूर्ण समाज के लिए सेवा और त्याग की एक बड़ी प्रेरणा है।”
— डॉ. विवेकानंद, चेयरमैन, श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज
समाज के लिए प्रेरणा
संस्थान ने इस पुनीत कार्य के लिए ओमप्रकाश जी और उनके परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, डेरा सच्चा सौदा के प्रति भी कृतज्ञता प्रकट की गई, जिनके विचारों ने कांति देवी को इस महान कार्य के लिए प्रेरित किया। इस देहदान से आने वाले समय में चिकित्सा जगत के छात्रों को शोध और अध्ययन में बड़ी मदद मिलेगी।
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