लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत महद्दीपुर पंचायत में आस्था और सामाजिक सहभागिता की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली। वार्ड संख्या 2 स्थित आदर्श गांव महद्दीपुर में वर्षों से उपेक्षित पड़े एक ऐतिहासिक कुएं का न केवल जीर्णोद्धार किया गया, बल्कि पूरे विधि-विधान के साथ उसका ‘विवाह’ संस्कार भी संपन्न कराया गया।
जीर्णोद्धार से मिला नया स्वरूप
भगवती स्थान के समीप स्थित यह कुआं लंबे समय से बदहाल था। ग्राम पंचायत राज महद्दीपुर और स्थानीय ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास कर इसका कायाकल्प किया। नव स्वरूप में सजे इस कुएं को एक बार फिर गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया है।

वैदिक मंत्रोच्चार और मंगल गीतों के बीच रस्में
शनिवार की रात कुएं के विवाह का आयोजन उत्सव के रूप में किया गया। इस दौरान पूरा गांव भक्ति और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया। विवाह की रस्में पूरी तरह पारंपरिक थीं।
- प्रतीकात्मक विवाह: बेल की लकड़ी से भगवान विष्णु के रूप में ‘वर’ की आकृति तैयार की गई।
- भव्य बारात: गाजे-बाजे के साथ बारात निकाली गई, जिसमें ग्रामीण उत्साह के साथ शामिल हुए।
- सांस्कृतिक गूंज: महिलाओं द्वारा गाए गए पारंपरिक मंगल गीतों और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को श्रद्धापूर्ण बना दिया।
क्यों जरूरी है ‘कुआं विवाह’?
मुखिया प्रतिनिधि अमन कुमार ने इस परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
”कुएं का विवाह एक सदियों पुरानी लोक परंपरा है। मान्यता है कि इस संस्कार के बिना कुएं के जल का उपयोग मांगलिक कार्यों में नहीं किया जाता। अब इस शुद्धिकरण के बाद कुएं के जल का प्रयोग शादी-विवाह, यज्ञ-हवन और अन्य शुभ अवसरों पर किया जा सकेगा।”
जल संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश
ग्रामीणों के अनुसार, यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जल स्रोतों के संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को बचाने का एक सशक्त संदेश है। इस अवसर पर गांव में 24 घंटे का अखंड रामधुनी महायज्ञ भी आयोजित किया गया, जिससे समूचा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
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