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उपलब्धियों से भरा रहा डॉ श्री कांत चौधरी का कार्यकाल

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : “माना कि ये दौर बदलते जायेंगे, आप जायेंगे तो कोई और आयेंगे…मगर आपकी कमी सभी के दिलों में हमेशा रहेगी, सच कहते हैं इस इलाके के लोग कि ईक पल न भूल पाएंगे”

उक्त पंक्तियां कबीर मोती दर्शन महाविद्यालय परबत्ता के प्रार्चाय डॉ श्री कांत चौधरी के 31 दिसंबर को सेवानिवृत होने पर शिक्षाविदों के द्वारा कहते हुए सुना गया. बताया जाता है कि प्राचार्य डॉ श्री कांत चौधरी का कॉलेज के विकास व वहां के शैक्षणिक माहौल को तैयार करने में काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. 6 वर्षो से अधिक समय तक वो सेवाभाव से एक दैनिक अखबार के लिए पत्रकारिता भी करते रहे.

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डॉ श्री कांत चौधरी का जन्म 1 जनवरी 1955 को तत्कालीन मुंगेर जिला के गोगरी प्रखंड अंतर्गत जानकीचक गांव में कुंजो चौधरी व बनारसी देवी के घर हुआ था. जानकीचक गंगा के दियारा क्षेत्र में अवस्थित एक कटाव पीड़ित गांव था. बचपन में ही लंबी बीमारी के बाद पिता की आकस्मिक निधन पर तीन भाइयों में सबसे छोटे श्रीकांत चौधरी का देखभाल उनके अग्रज महेंद्र चौधरी ने किया. एक किसान परिवार से होने और पिता की मृत्यु के साथ कृषि योग्य भूमि का गंगा के कटाव मे तबाह हो जाने पर उनका घर भी गंगा में समा गया. जिसके उपरांत जानकीचक गांव कुछ दूरी पर जाकर बस गया. इन तमाम झंझावात और परेशानियों को झेलते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और हाई स्कूल की परीक्षा 1972 ई में पास कर ली. तत्पश्चात बिहार ही नहीं बल्कि पूर्वी भारत के प्रतिष्ठित महाविद्यालय टीएनबी महाविद्यालय भागलपुर से इंटरमीडिएट की परीक्षा 1974 ई में उत्तीर्ण किया और फिर उसी महाविद्यालय से राजनीति शास्त्र से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. 1976 ई में स्नातक की परीक्षा पास करने के उपरांत 1978 में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल कर लिया.




बाद के दिनों में श्री कांत चौधरी आर्थिक जरूरतों और सामाजिक दायित्वों की पूर्ति हेतु शिक्षण कार्य को अपना पेशा चुना. इस क्रम में 13 फरवरी 1981 को वे केएमडी महाविद्यालय परबत्ता में राजनीति शास्त्र के व्याख्याता के रूप में अपना योगदान दिया. नियुक्ति के उपरांत महाविद्यालय के अंगीभूत होने के साथ ही उनका सपना साकार हुआ. 13 फरवरी 1991 को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें प्रोन्नति दिया गया और वे उपाचार्य (रीडर) बने. 1 जनवरी 2006 को पुनः विश्वविद्यालय ने उन्हें सह-आचार्य (एसोसिएट प्रोफेसर) के रूप में री- डेजिग्नेट किया. इस बीच अर्थशास्त्र के शिक्षक डॉ अजय कुमार के निर्देशन में दिसम्बर 2004 में उन्होंने पीएचडी की उपाधि भी हासिल कर ली. इस क्रम में शोध के साथ-साथ शिक्षा देने की जिम्मेदारियों का भी बखूबी निर्वहन करते रहे.

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शिक्षण, शोध तथा प्रशासनिक कार्यों में निपुणता और वरीयता के आधार पर डॉ श्री कांत चौधरी 17 जनवरी 2017 को एम डी महाविद्यालय परबत्ता के प्रधानाचार्य पद पर नियुक्त किये गये. इस बीच 18 मार्च 2018 को मुंगेर विश्वविद्यालय मुंगेर की स्थापना के साथ ही इस महाविद्यालय को मुंगेर विश्वविद्यालय से संबंधित कर दिया गया. साथ ही मुंगेर विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालय के प्राचार्य के नाते पदेन सदस्य के रूप में विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद और अभिषद सदस्य के रूप में भी उनका मनोनयन हुआ. विद्वत परिषद और अभिषद की तमाम बैठकों में भाग लेते हुए वे नवनिर्मित विश्वविद्यालय को आगे ले जाने हेतु रूपरेखा तैयार करने में अहम योगदान देते रहे. विभिन्न जिम्मेदारियों को बखूबी निर्वहन करते हुए वे महाविद्यालय में ढांचागत सुविधाओं के विकास हेतु भी लगातार प्रयासरत रहे. महाविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों में उत्तरोत्तर सुधार की कोशिशों में सफलता प्राप्त करते हुए 39 वर्षो तक सेवा देने के बाद 3 जनवरी 2019 को वे सेवानिवृत्त हो गए. बहरहाल महाविद्यालय परिवार उनकी उपलब्धियों को कभी भूला नहीं सकता.


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