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पेशेवर शिल्पकार नहीं बल्कि गांव का ही एक परिवार बनाता है इस मंदिर में मां की प्रतिमा




लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिले के परबत्ता प्रखंड के नयागांव सतखुट्टी स्थित माँ दुर्गा मंदिर स्वर्ण देवी के नाम से विख्यात है. बताया जाता है सन् 1880 ई. के द्वितीय दशक में सप्तमी वंश के मेहरबान सिंह को देवी ने दर्शन देकर मंदिर स्थापित कर पूजा प्रारंभ करने का प्रेरणा दिया था और तब से यहां पूजा प्रारंभ हुआ. उस वक्त यह मंदिर वर्तमान स्थल से दूर सतखुट्टी टोले में स्थित था. कलांतर में गंगा नदी के कटाव से यह टोला विस्थापित हो गया. कहा जाता है कि टोले की पूरी आबादी को कटाव से विस्थापित करने के बाद गंगा नदी मंदिर तक पहुंचकर अपने मूल स्थान की और वापस लौट गई. बाद के दिनों में जहां मंदिर स्थापित था वह स्थान एक टीले के रूप में उभरकर आया.

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सबकी मन्नतें पूर्ण करती हैं स्वर्ण देवी

वर्ष 1979 में पुराने मंदिर के मिट्टी को एकत्रित कर वर्तमान स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. एेसी मान्यता है कि माँ दुर्गा के इस दरबार से आज तक कोई खाली हाथ नहीं लौटा है. भक्तजन यहां चढावा में सोने की आभूषण देते हैं. इसलिए माता का यह स्थान स्वर्ण देवी के नाम विख्यात है. यहां शारदीय नवरात्रा में संध्या के समय भव्य आरती का आयोजन होता है.




पूर्व जिला परिषद सदस्य शैलेन्द्र कुमार शैलेश ने बताते हैं कि भारी बारिश के बावजूद भक्तजनो का उत्साह चरम पर है. वहीं नवरात्रा के प्रथम दिन रविवार को मंदिर से गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली गई और पुरानी परंपरा के तहत पूर्ण संकल्प के साथ मंदिर के मुख्य पुरोहित डब्लू मिश्र ने कलश में गंगा जल भरकर मंदिर लाया. इस क्रम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.

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मंदिर में चतुर्भुज दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण सिद्ध शिल्पकार के बजाय गांव के ही एक ही परिवार के सदस्यों के द्वारा किया जाता है. मान्यता के अनुसार नयागांव के कार्तिक स्वर्णकार के पूर्वजों को मां दुर्गा ने स्वप्न दिया था कि मेरी प्रतिमा प्रत्येक वर्ष तुम या तुम्हारे परिवार का कोई भी सदस्य बनाएगा. प्रचलित है कि ऐसे में स्वर्णकार ने कहा कि “हे मां मुझे मूर्ति बनाना नहीं आता है और मेरे वंशज भी यह काम करेंगे या नहीं यह भी मैं नहीं जानता”. बताया जाता है कि तब माता ने स्वर्णकार से कहा कि “तुम केवल मिट्टी रखते जाओ और प्रतिमा खुद बन जाएगी”. इतना कहते ही भगवती अन्तरध्यान हो गई. तब से आज तक बिना किसी प्रशिक्षण के इस परिवार के लोगों के द्वारा प्रतिमा निर्माण किया जा रहा है. शारदीय नवरात्रा में इस मंदिर में भक्तों का जन सैलाब उमड़ पडता हैं. नयागांव सतखुट्टी का यह मंदिर मां दुर्गा सिद्धि पीठ के रूप में भी जाना जाता है.


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