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वायरल पोस्ट पर छलका डीएम का दर्द व बेबाकी से तथ्यों से अवगत करा गये वो




लाइव खगड़िया : जिले के विभिन्न वाट्सएप ग्रुपों पर गुरूवार को एक पोस्ट काफी तेजी से वायरल हो रहा था. जिसमें बीते दिनों कोविड 19 से संक्रमित जिले के चर्चित कवि सह शिक्षक कैलाश झा किंकर के मौत के बाद उनके परिवार के हालात का जिक्र करते हुए मदद की गुहार लगाई गई थी.

पढ़ें वो वायरल पोस्ट

कोई भी बिहार से प्रशासनिक स्तर पर मदद कर सके तो करे कृपया

बहुत दुखद समाचार है।स्मृति शेष कैलाश झा किंकर जी का पूरा परिवार खतरे में हैं पर खगड़िया प्रशासन चुप्पी साधे हैं।

किंकर परिवार खतरे में

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सहायतार्थ आगे आएँ और कुछ मदद कर सकते हैं तो करें!

पटल के सभी दोस्तो! किंकर परिवार की कारुणिक कथा, रोंगटे खड़े कर रही है! मित्र कैलाश किंकर कोरोना के इसी षड्यंत्र के शिकार होकर काल के गाल में समा गए। आज उनका 4 था दिन है।

उनकी पत्नी और मँझले बेटे को भी कोरोना पाजिटिव हो गया है, वे घर में ही ऊपर के फ्लोर में होम क्वरेंन्टाइन हैं।बाकी परिवार के सदस्य निगेटिव हैं जो नीचे के फ्लोर पर हैं!

दर्दनाक स्थिति यह है कि घर में सब्जी नहीं, दूध नहीं, अनाज नहीं! घर से कचरा भी बाहर नहीं! सोसाइटी के लोगों को /प्रशासन को मालूम है कि उस घर के निचले तल पर रहनेवाले भी 4-5 सदस्य हैं! लेकिन सोसाइटी के लोग उनके घर के पास न सब्जी वाले को न दूध वाले को जाने देता है। कचरा कलेक्ट करनेवाले को भी उधर जाने से मना कर दिया गया है! ऊपर से लाकडाऊन है। वह परिवार खायगा क्या! जिसको कोरोना पाजिटिव है उसके लिए क्या खाना बनेगा। अभी एक बजे दिन तक उन्हें खाने के लिए कुछ नहीं दिया जा सका। कैसे उनकी इम्युनिटी बढ़ेगी? कैसे वे जियेंगे?परिवार के जिन सदस्यों को

कोरोना नहीं है.. बिन खाए कैसे रहेंगे वे? सोसाइटी के लोगों को डर समाया है, वे खुद भी उन्हें देखने नहीं जाते दूसरों को भी जाने नहीं दे रहे।

ऐसी विषम और दारुण स्थिति में प्रशासन ही कुछ कर सकता है! पुलिस द्वारा और हेल्थ विभाग के कर्मचारियों द्वारा या जिलाधिकारी /कोरोना प्रभारी ही उनके घर अनाज /सब्जी /दूध /दवा भेजकर इस परिवार की रक्षा कर सकता है। परिवार ने 4 दिन पहले अपना गार्जियन खो दिया है! बाकी की जिंदगी खतरे में है।

अतः आप सबसे निवेदन है कि परिवार के इस दारुण स्थिति में उनकी मदद के जिलाधिकारी /एस पी तक विभिन्न माध्यमों से खबर पहुँचाएँ और उनसे मदद की अपील करें।संकट से घिरे इस परिवार को बचाने के लिए उनपर फोन /ईमेल /न्यूज /और टीवी चैनलों द्वारा वस्तु स्थिति की जानकारी देते हुए दबाव बनाएँ कि परिवार के बचे हुए सदस्यों की सुरक्षा हो!

यह जानकारी कैलाश किंकर जी के सुपुत्र सुमन जी के द्वारा मुझे मिली, जब मैं ने फोन किया। ऐसे में श्राद्ध कर्म के विधि विधान कैसे पूरे हों, वह गौन प्रश्न हो गया है!

इसलिए बड़ी बड़ी बातें बाद में.. अभी तो इस परिवार की अस्तित्व रक्षा के लिए! अपने अपने स्तर से तुरंत मदद के लिए सक्रिय हो जाए. अभी जरूरत है – आपके हमारे इनके साथ संकट की घड़ी में डटकर खड़े होने की!

Ranjana Singh ki wall se ..

Khagaria Ke jo bhi mitr Meri suchi me hai .

Plz yaha msg kijiye ..ghabraiye nahi aapko waha jane ko nahi kaha jayega bas waha ki kuch jankari chahiye

दरअसल इस पोस्ट के वायरल होने के साथ जिला प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े होने लगे थे. ऐसे में जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष सामने आये और उन्होंने मामले के विभिन्न बिन्दुओं पर दो पोस्ट के माध्यम से अपनी बातों को जब सामने रखा तो मामले का दूसरा पहलू भी सामने आ गया.

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पढें वायरल पोस्ट को लेकर जिलाधिकारी के द्वारा किया गया पोस्ट

वायरल पोस्ट से संबंधित कुछ तथ्य।

कोविड पॉजिटिव व्यक्तियों की मृत्यु होने पर मुख्य मंत्री राहत कोष से दी जाने वाली रु.4 लाख की राशि उनके परिवार को कल दिनांक 15.07.20 को ही उपलब्ध करा दी गयी है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बिहार को आवश्यक कार्यार्थ इस आशय की सूचना दी जा चुकी है।

बृहत स्वास्थ्य हित में मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार उनका आवास सील किया गया है एवं श्राद्ध कर्म हेतु आवश्यक व्यवस्था की जा चुकी है।

रास्ता रोके जाने का विषय उनके अपने गोतिया के बीच का विवाद था जिसका हल निकाल दिया गया है।

दैनिक आवश्यकताओं के लिए अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा व्यवस्था की जाएगी।

श्री किंकर के परिवार जनों की सैंपलिंग कराई जा चुकी थी एवं इसी कारण उन्हें इस बात की सूचना थी कि उनके परिवार के दो सदस्य पॉजिटिव हैं।

उनके द्वारा स्वयं होम आइसोलेशन का विकल्प चुने जाने के कारण उनके घर पर ही रहने दिया गया आवश्यक दिशा निर्देश के साथ।

समस्या के निदान हेतु श्री किंकर के परिवार जन ही नहीं कोई भी कभी भी ज़िला प्रशासन से सीधे संपर्क कर सकते हैं। ऐसे संदेश प्रशासन के उन तमाम कर्मियो के मनोबल को आहत करते हैं जो इस पुनीत कार्य में खतरों को जानते हुए भी डटे हुए हैं।

समाज में कोविड पॉजिटिव व्यक्तियों के लिये घृणा नहीं बल्कि प्रेम का भाव जागृत करने की आवश्यकता है सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए। उनसे मिलने से परहेज़ अवश्य करें पर उनका बहिष्कार कदापि न करें।

श्री किंकर के निधन से हम सब मर्माहत हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।

आगे पढ़ें जिलाधिकारी के द्वारा जिलेवासियों ने नाम संबोधित उनका दूसरा पोस्ट

प्रिय ज़िला वासियों

कोरोना वैश्विक महामारी का दंश हम सब झेल रहे हैं। शायद इसकी व्यापकता की कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी। वर्तमान में विश्व के अधिकांश प्रांत इससे प्रभावित हैं। अपना खगड़िया भी इससे अछूता नहीं है।

दुर्भाग्यवश विगत सोमवार को इस ज़िले के एक अत्यंत प्रसिद्ध कवि श्री किंकर जी का भी निधन कोविड पॉजिटिव रहते हुए हो गया। हालांकि मेरा उनसे निजी संपर्क नहीं हो सका था परंतु विगत कुछ दिनों में उनके बारे में काफी कुछ जानने को मिला। मैंने पाया कि उनकी बहुमुखी प्रतिभा वाले व्यक्तित्व ने लगभग सबको प्रभावित किया है।

इस दुख की बेला में ही सोशल मीडिया के माध्यम से कई बातें कही गयीं। उनके द्वारा प्रेषित संदेश को भी प्रचारित किया गया। उसके मायने निकाले गए। मृत्यु के संभावित नहीं बल्कि निश्चित कारण को भी स्थापित किया गया।

आज पुनः एक और वायरल पोस्ट पढ़ने का मौका मिला जिसमे प्रशासन पर दबाव डाल कर समाधान ढूंढने जैसे परामर्श भी दिया। यह भी बताए जाने का प्रयास किया गया कि किस प्रकार कोविड पॉजिटिव एक परिवार को जान बूझ कर घर पर ही बिना उपचार छोड़ दिया गया। प्रशासन की ओर से किसी के द्वारा सुध भी नहीं ली गयी।

एक तरह से उद्देश्य सफल रहा। खबर आग सी फैली। जैसा अपेक्षित था विषय की सत्यता की गहन जांच किसी ने नहीं की। मुझे कई कॉल भी आये। किसी ने कहा कि कृपया ध्यान दिया जाए। परिवार कष्ट में है। किसी का कहना था कि उनको अस्पताल क्यों नहीं भेजा गया। किन्ही का कहना था कि किस से पूछ कर आपने उनका श्राद्ध कर्म रुकवा दिया। ये अधिकार आपको किसने दिया। किसी ने ये तक कहा कि कोरोना पोसिटिव परिवार के सदस्यों की जांच क्यों नहीं कि गयी।

खुशी हुई कि कम से कम मानवीयता ज़िंदा तो है। एक पोस्ट से प्रभावित हो कर लोगों ने चिंता तो व्यक्त की। शायद इस ऊर्जा का सदुपयोग इस संक्रमण के संबंध में जानकारी फैलाने हेतु भी किया जाना चाहिये।

की गई टिप्पणी से आहत हुआ तो लगा कुछ अपनी बात भी रखी जाए। सो कहता हूँ…

देवियों/ सज्जनों

विगत 4 माह कैसे बीते हैं शब्दों में बांधना कठिन है। हर दिन हमारी टीम के लिये एक नई चुनौती है। मेरी टीम को आपकी हौसला अफजाई की बहुत ज़रूरत है ताकि मनोबल बना रहे। पर वो न भी मिले तो भी हम डटे रहेंगे। उपलब्ध संसाधन से अच्छा काम करने का प्रयास करेंगे। वैसे देखा जाए तो कुछ भी परफेक्ट नहीं होता। सुधार की संभावना हर समय रहती है। जो सुझाव प्राप्त होते हैं उनपर कार्य करने हेतु हम तत्पर हैं पर इसके बावजूद हम सब को समझने की ज़रूरत है कि हमारी भी कुछ सीमाएँ हैं। हमारे बीच में ऐसे कई पदाधिकारी/कर्मी इस कार्य को करते करते पॉजिटिव भी हुए पर उन्होंने आह तक नहीं भरी। कभी ये नहीं कहा कि उनका क्या दोष था। बल्कि ठीक होते ही पुनः कार्य में लग गए। उनका भी परिवार है जो रोज़ इस आशंका में जीता है कि कहीं आज वो अपने साथ कुछ और तो नहीं ले कर लौटे हैं। उन सबका में आभारी हूँ। मेरी टीम के पास रुकने का विकल्प ही नहीं है क्योंकि हमारी ज़रूरत उन तमाम लोगों को है जो इस संकट से गुज़र रहे हैं। शायद यही एक सोच उन्हें सब सहते हुए कार्य करते रहने की प्रेरणा देती है। सब अपनी क्षमता अपनी योग्यता अनुसार यत्न कर रहे हैं। इस दौरान कुछ कमियाँ रही हैं जिन्हें दुरुस्त करने का प्रयास कर रहे हैं ।

लक्ष्य के अनुरूप सैंपलिंग, रिपोर्टिंग, चिकित्सीय सेवा, काउंसलिंग करना। हमारी आपकी अपेक्षाएं ,डाँट फटकार को सहते हुए भी ये टीम लगी हुई है। भविष्य के गर्भ में क्या रखा है पता नहीं। ये ज़रूर पता है कि हम आखरी सांस तक सबकी सेवा में लगे रहेंगे।

इंतज़ार है तो बस इस त्रासदी के पटाक्षेप का। आइये मिल कर इसे हराएं।

इति।

आलोक

बहरहाल जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष का यह दोनों पोस्ट भी सोशल साइट पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है.

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