लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : फाल्गुन मास के पूर्णिमा की रात्रि एवं चैत माह की पहली किरण से शुरू होने वाला “डोरा पूजा’ जिले में श्रद्धा व भक्ति के साथ प्रारंभ हो चुकी है.यह पूजा बैसाख में सम्पन्न होगी.दो माह तक चलने वाला पूजा सप्ताह में एक दिन रविवार को होती हैं.पूजा करने वाली महिलाएं बताती हैं कि पौराणिक दंत कथा के अनुसार एक राजा की रानी ने डोरा पूजा किया.लेकिन राजा ने अहंकार बस उस डोरे के पवित्र धागे को जला दिया.जिसके बाद राजा व रानी को काफी कष्ट झेलना पड़ा.इस बीच एक दिन नदी के किनारे महिलाओं की एक टोली को डोरा पूजा करते हुए जब राजा ने देखा तो वे अपने अहंकार को त्याग कर पूजा में शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया.जिसके उपरांत उनके सारे दुख दूर हो गए.
डोरा पूजा में सूर्य भगवान एवं सप्ता माता की पूजा की जाती है.प्रत्येक रविवार को पूजा के समय एक महिला सप्ता माता की कथा सुनाती है तथा सूर्य भगवान को दूध एवं गंगाजल से अर्घ्य दिया जाता है.पूजा विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवान व मिष्ठान से की जाती है.
पंडित अजय कांत ठाकुर व चन्द्रभुषण मिश्र बताते हैं कि डोरा पूजा महिलाएं अपने पति एवं पुत्र के दीर्घायु होने के लिए करती हैं.पूजा को लेकर कई गांव में भक्ति का माहौल देखा जा रहा है.डोरा पूजा के समय महिलाएं अपने अपने दाएं हाथ की वांह में डोरा यानी धागे बांध कर कथा श्रवण करती हैं.डोरा पूजा में इस पवित्र धागे का बड़ा ही महत्व है.

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