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एक महिला जो विकट परिस्थितियों में भी कभी हिम्मत नहीं हारी

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लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है.यह महिलाओं के अस्तित्व, अधिकार व आत्मसम्मान के सम्मान का दिन है और दुनियाभर में आज महिला दिवस मनाया जा रहा है.इस अवसर पर ‘लाइव खगड़िया’ जिले के एक ऐसी महिला का जिक्र कर रहा है जिन्होनें ना सिर्फ विकट परिस्थितियों में खुद के लिए एक नई मंजिल तलाश की बल्कि अपने कार्यकाल के दौरान सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बनाया.हम बात कर रहे हैं जिले के परबत्ता प्रखंड के खजरैठा निवासी राजनीति प्रसाद राय की पत्नी सेवानिवृत कार्यपालक दंडाधिकारी आशा रानी की.जिन्होंने जिन्दगी की जद्दोजहद के बीच रूढ़िवादी परंपरा को पीछे छोड़ते हुए समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल रही.

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आशा रानी जब दो साल की थी तो उनकी मां इस दुनियां से चली गई.प्रारंभिक शिक्षा नक छेदी कुंवर उच्च विद्यालय झंडापुर तथा हिन्दी में स्नातक सुंदरवती महिला महाविद्यालय भागलपुर से करने के उपरांत उन्होंने पुनः मुजफ्फरपुर से गृह विज्ञान में स्नातक व स्नाकोत्तर की डीग्री प्राप्त किया.वर्ष 1986 में वे अवर सेवा चयन की परीक्षा में सफल रही और उन्हें पद ग्रहण करने के लिए खगड़िया जिला मुख्यालय भेजा गया.उसी वर्ष उन्होंने बेलदौर प्रखंड में प्रखंड महिला प्रसार पदाधिकारी के रुप में अपना योगदान दिया.उस वक्त संसाधनों के अभाव में बेलदौर प्रखंड जाना नाकों चने चबाने के समान था.लेकिन विकट परिस्थितियों में भी वो पैदल वहां जाकर अपनी कार्य निभाती रही.इस दौरान घर की दहलीज से बाहर निकलने पर उन्हें लोगो के ताने का भी सामना करना पड़ा.लेकिन बुलंद इरादे के साथ आशा रानी ने अपने कुल देवता ठाकुर जी के आशीर्वाद एवं पति के सहयोग के बदौलत अपनी मंजिल की तरह निरंतर बढ़ती रही.




संगीत, साहित्य, अध्यात्म ,लेखन  कला में रूचि रखने वाले आशा रानी राज्य के आधा दर्जन से अधिक प्रखंड में प्रखंड महिला प्रसार पदाधिकारी के रुप में स्वर्ण जयंती ग्राम रोजगार योजना के तहत सैकड़ो महिलाओ को अत्मनिर्भर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.वे इसी वर्ष 31 जनवरी को दानापुर प्रखंड से कार्यपालक दंडाधिकारी पद से सेवानिवृत हुई हैं.करीब आधा दर्जन महिला IAS के साथ कार्य कर चुकी आशा रानी को विभाग की ओर से कई बार सम्मान भी मिल चुका है.

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इसके अलावे वे अंतरराष्ट्रीय मेला में भी राज्य के स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना से जुड़ी महिलाओं के साथ प्रतिनिधित्व कर चुकी है.उन्होंने ना सिर्फ सरकारी सेवाओं के दौरान अपनी जिम्मेदारी को बाखुबी निर्वहन किया बल्कि अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी वैसे ही निभाया.आशा रानी को एक पुत्र एवं एक पुत्री हैं.पुत्र जहां इंजीनियर हैं तो पुत्रवधु व पुत्री एमबीए कर चुकी हैं.यह भी एक संयोग है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज ही उनकी शादी की 43वां सालगीरह भी है.भले ही आशा रानी को खगडिया जिले मेें बहुत कम लोग जानते व पहचानते होे लेकिन पटना जिले के सैकड़ों महिलाएं उनके कार्य एवं सहयोग को कभी नहीं भूल सकते हैं.बहरहाल आशा रानी जिला सहित प्रदेश की महिलाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं.


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