लाइव खगड़िया : 13 प्वाइंट रोस्टर के विरोध में आहूत भारत बंद के दौरान मंगलवार को अतिपिछड़ा अधिकार मंच के द्वारा गोगरी कोर्ट परिसर से रजिस्ट्री मोड़ तक रोड मार्च किया गया.इस दौरान बंद के समर्थन में जमकर नारेबाजी की गई. मौके पर मंच के उपाध्यक्ष दिलीप सहनी ने कहा सवर्ण आरक्षण लागू करके मोदी सरकार ने संविधान की हत्या की है.आरक्षण कोई ग़रीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है और न ही यह रोजगार की गारंटी से जुड़ा मामला है. यह ऐतिहासिक रूप से भेदभाव के शिकार दलित और संस्थानिक रूप से अधिकारों से वंचित पिछड़ों,अतिपिछड़ों को सत्ता व शासन में प्रतिनिधित्व व भागीदारी सुनिश्चित करने से जुड़ा मामला है.साथ ही उन्होंने कहा कि आज भी विभिन्न विभागों में दलितों, अतिपिछड़ों, पिछड़ों की भागीदारी बहुत कम है. केन्द्र सरकार के सरकारी ग्रुप A की नौकरियों में सवर्ण 74.48 प्रतिशत, OBC 8.378 प्रतिशत, SC 12.06 प्रतिशत हैं.जबकि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका में भी सवर्ण समाज का प्रतिनिधित्व आबादी के अनुपात में कई गुणा अधिक है.बावजूद इसके सवर्ण को आरक्षण देना संविधान के मूल संरचना को खत्म करने के समान है.
वहीं मंच के दिवाकर शर्मा ने कहा कि 13 प्वाइंट रोस्टर लागू करके मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि उन्होंने अतिपिछड़ा, पिछड़ा,दलितों के बच्चों को उच्च शिक्षा में जाने का रास्ता बंद कर दिया है.अतिपिछड़ों पर जिस तरह उत्पीड़न हो रहा है ऐसे में सरकार अगर अतिपिछड़ों के लिए उत्पीड़न निवारण कानून नहीं लागू करती है तो आगामी लोकसभा चुनाव में अतिपिछड़ा समाज मोदी सरकार को धूल चटाने का काम करेगी.जबकि नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि बहुजन समाज के लोगों ने संकल्प लिया है कि किसी भी सूरत में सवर्ण समाज के उम्मीदवार को विधानसभा या लोकसभा चुनाव में वोट नहीं करेंगे.वहीं निर्भय निषाद ने अतिपिछड़ों को प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए 33 प्रतिशत सीट विधानसभा और लोकसभा में आरक्षित करने की बातें कही.जबकि मंच के अध्यक्ष नवीन प्रजापति ने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई को नए सिरे से आगे बढ़ाने के काम की शुरुआत हुई है और पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित समाज के युवा पीढ़ी इस अभियान से जुड़ रहे हैं.
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