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माघी पूर्णिमा कल,अगुवानी घाट पर उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़,व्यवस्था नदारद




लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : हिन्दू धर्म में माघ पूर्णिमा का कार्तिक पूर्णिमा जैसा ही महत्व है.इस वर्ष माघ पूर्णिमा 19 फरवरी को है.जिले के सदर प्रखंड के संसारपुर गांव निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर बताते हैं कि वैसे तो वर्ष के प्रत्येक माह की पूर्णिमा का महत्व है.लेकिन माघ पूर्णिमा की बात ही कुछ अलग है.मान्यता रही है कि माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों तथा सरोवरों या संभव हो तो संगम में आस्था की डुबकी लगाने से व्यक्ति के सारे पाप कट जाते है तथा उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है.बताया जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है.जिसे सत्यनारायण पूजा भी कहते है.इस दिन उपासक भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, पान, सुपारी, दूर्वा सहित प्रसाद के लिए चूरमा से किया जाता है और भगवान विष्णु व्रती के विधि-विधान से सम्पन्न किये गए पूजा को स्वीकार करते हैं.पूजा के क्रम में भगवान विष्णु से परिवार के सुख, शांति और मंगलकामना मांगी जाती है और भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से व्रती का सदैव मंगल होता है.

फाइल फोटो

कहा जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान करना चाहिए.इस दिन गंगा, यमुना तथा पवित्र नदियों में स्नान करने से समस्त पाप का नाश होता है और अमोघ फल की प्राप्ति होती है।.शास्त्रो में उल्लेख है कि जो मनुष्य स्वर्ग की अभिलाषा करते है तथा स्वर्ग में अत्यधिक समय तक सुख का आनंद पाना चाहते हैं, उन्हें माघ पूर्णिमा के दिन (जब सूर्य मकर राशि में होेता है) पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए. इससे मनुष्य की आकांक्षा पूरी होती है.

खगड़िया एक कृषि प्रधान इलाका रहा है और यहां की उपजाऊ भूमि समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.जिले के परबत्ता प्रखंड के दक्षिणी भाग में प्रसिद्ध उत्तर वाहिनी गंगा बहती हैं.जहां माघी पूर्णिमा के दिन हजारों हजार की संख्या में महिला एवं पुरुष गंगा स्नान  के लिए शामिल होते हैं.श्रद्धालुओं का जन सैलाब माघी पूर्णिमा के दिन इस पवित्र गंगा तट पर उमड़ जाती है.पौराणिक मान्यता के अनुसार माघी पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान एवं दान पुण्य फलदायी सिद्ध होता है.माघी पूर्णिमा पर भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं.अत: इस पावन समय गंगाजल का स्पर्श मात्र भी स्वर्ग की प्राप्ति देता हैं.माघ पूर्णिमा के दिन महास्नान समस्त रोगों को शांत करने वाल होता है.कहा जाता है इस समय ‘ओम: भगवते वासुदेवाय नम:’ का जप करते हुए स्नान व दान करना चाहिए.




गुम होने लगी है बैल के गले में बंधे घंटी की आवाज

एक वो वक्त भी था.जब माघी पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु अपने घर से बैलगाड़ी से गंगा तट पर पहुंचते थे.लेकिन अब इसका स्थान ट्रैक्टर, मोटर साइकिल,  साईकिल एवं अन्य वाहनों ने ले लिया है.पूर्व में बैलगाड़ी का माघी पूर्णिमा में अपना एक अलग क्रेज था और इनकी संख्या सैकड़ों में होती थीं.लेकिन अब यह चलन खत्म होता जा रहा है.क्योंकि पहले सड़क मार्ग और यातायात के अन्य साधनों का अभाव था.बावजूद इसके आज भी दियारा इलाके में बैलगाड़ी का उपयोग होता है.एक वो वक्त भी था जब सरस्वती पूजा के बाद गांव के लोग माघी पूर्णिमा में स्नान करने के लिए तैयारियों प्रारंभ कर देते थे.इस क्रम में बैलगाड़ी को दुरुस्त करने का कार्य किया जाता था और बैल के गले में रंग बिरंगे घंटी एवं घुंघरू बांधकर माघी पूर्णिमा में बैलगाड़ी पर सवार होकर गंगा स्नान करने के लिए लोग जाते थे.लेकिन अब बैलों के गले में बंधे घंटी की आवाज गुम होने लगी है.वो दौर भी रहा था जब बैलगाड़ी को सजाने की होड़ मची रहती थी.साथ ही अगुवानी गंगा घाट पर माघी पूर्णिमा के दिन पहलवानों का जमावड़ा भी लगता था.लेकिन वक्त के साथ ये बातें भी पुरानी हो चली है.गंगा तट पर कुश्ती दंगल प्रतियोगिता में दूर-दूर के नामचीन पहलवान अपनी ताकत दिखाते थे और हजारों की संख्या में लोग कुश्ती प्रतियोगिता का आनन्द गंगा तट पर लेते थे.

गंगा तट पर रहता है उत्सवी माहौल

माघी पूर्णिमा के अवसर पर गंगा किनारे विभिन्न प्रकार की दुकानें सजती है और श्रद्धालु जमकर खरीदारी करते है.अगुवानी के गंगा घाट पर माघी पूर्णिमा के दिन एक से बढ़कर एक घोड़ा देखने को मिलता है.घोडसवार अपने हाथों में लगाम थाम चाबुक के इशारे से घोड़े को थिरकने को मजबूत कर देते हैं.घोड़े की टाप एवं पैरों व गले में बंधे घुंघरू की आवाज से एक अलग नजारा दिखता है.माघी पुर्णिमा के अवसर पर  लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराते हैं.साथ ही दिनभर घाट पर अखंड रामधुन का आयोजन होता है.गंगा स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं के द्वारा गंगाजल तथा गंगा नदी किनारे की मिट्टी ले जाने की भी परंपरा रही है.जिसका उपयोग पूजा के अवसर पर किया जाता है.इस वर्ष श्रद्धालु माघी पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान के साथ अगुवानी घाट पुल निर्माण कार्य को देखने की उत्सुकता निश्चय ही दिखायेंगे.

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन गंभीर नहीं

जो स्थितियां उभर कर सामने आ रही है उससे तो ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस वर्ष प्रखंड प्रशासन माघी पूर्णिमा के अवसर पर अगुवानी घाट पर जुटने वाली श्रद्धालुओं के भीड़ की सुविधाओं के लिए गंभीर नहीं है.मिल रही जानकारी के अनुसार अबतक गंगा तट पर प्रशासन की तरफ से कोई खास इंतजाम नहीं किये गये हैं.बताया जाता है कि सुरक्षा के मद्देनजर ना तो घाटों की बेरिकेडिंग किया गया है और ना ही वहां साफ-सफाई के इंतजाम किये गये है.महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए अस्थायी रूप से बनने वाला चेंज रूम व शौचालय भी नहीं दिख रहा है.हलांकि कुछ संगठनों के द्वारा अपने स्तर से श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए कवायद किया जा रहा है.जबकि प्रशासनिक व्यवस्था देखने के लिए कल तक का इंतज़ार करना होगा.



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