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वतन के लिए शहीद हो गए खगड़िया का लाल,आतंकियों से मुठभेड़ में हुआ था घायल

खगड़िया : बीते 4 फरवरी को एलओसी पर पाकिस्तानी फौज के साथ मुठभेड़ में घायल हुए खगड़िया का आर्मी जवान किशोर कुमार मुन्ना भले ही इलाज के दौरान रविवार को आर्मी कैंप हॉस्पिटल में जिन्दगी का जंग हार गया हो.लेकिन उनके साहस व बहादुरी के किस्से ना सिर्फ जिले वासियों का दिल जीत लिया बल्कि उन्हें मुन्ना के शहादत पर नाज है.हलांकि उनके शहीद होने की खबरों के साथ उनकी माता तुलो देवी एवं बहन विनिता देवी के आंखों के आंसू नहीं सूख रहे हैं.वहीं उनकी चित्कार से वहां आने-जाने वालों की आंखें भी नम हो जा रही है.जबकि उनके पिता नागेश्वर प्रसाद यादव बिल्कुल स्तब्ध हैं.दूसरी तरफ पीड़ित परिवार को सांत्वना देने उनके सगे-संबंधी सहित जिले के विभिन्न राजनीतिक व समाजिक संगठनों के नेताओं का चौथम प्रखंड के ब्रह्मा गांव पहुंचने का सिलसिला जारी है.इस क्रम में युवा शक्ति के जिलाध्यक्ष चंदन सिंह,जाप के जिलाध्यक्ष दीपक चन्द्रवंशी, जिला महासचिव मोहन चौधरी, छात्र युवा शक्ति के रोशन कुमार,छात्र परिषद के जिलाध्यक्ष सुमित कुमार,युवा शक्ति के चौथम प्रखंड अध्यक्ष मुकेश कुमार देवराज,भाकपा के जिला महासचिव प्रभाकर प्रसाद सिंह आदि उनके पैतृक गांव पहुंचे और शहीद के परिजन को 50 लाख रूपये मुआवजा व एक को नौकरी सहित उनकी याद में स्मारक व शहीद द्वार के निर्माण की मांग उठाई.गौरतलब है कि आज ही शहीद का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचना है.

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शहीद जवान के.के.मुन्ना (फाईल फोटो)


दूसरी तरफ शहीद जवान के बहादुरी के किस्से भी लोगों के जुवान से चर्चाओं में है.बताया जाता है कि मुढभेड़ में जख्मी होने के बाबजूद भी मुन्ना ने चार पाकिस्तानी जवानों को मार गिराया था.यह बात उन्होंने फोन से घायलावस्था में ही अपनी बहन को बताया था.कहा जाता है कि मुन्ना छात्र जीवन से ही फौजी बनना चाहते थे और उनकी जनून ने ही उन्हें भारतीय सेना में पहुंचा दिया.छात्र जीवन से ही उन्हें खतरों से खेलने की आदत थी.छुट्टी में जब कभी वो घर आते तो वो ग्रामीणों को बताया करते थे कि जहां उनकी ड्यूटी है,वह जगह काफी खतरनाक है लेकिन उन्हें खतरों से खेलने में बहुत मजा आता है.उनके बारे में बताया जाता है कि वर्ष 2010 में इंटर की पढाई करने के बाद ही फौज में जाने की तैयारी में जुट गये थे और उन्हें वर्ष 2013 में आर्मी के जीडी पद के नौकरी के रूप में अपनी मंजील मिल भी गई.हैदराबाद में ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली पोस्टिंग डिब्रूगढ में हुआ था.जबकि पाकिस्तान के एलओसी बोर्डर के पुंज सेक्टर में महज सात माह पूर्व ही उनकी पोस्टिंग हुई थी.मिली जानकारी के अनुसार मुन्ना को अगले ही माह होली में अपने घर आना था.लेकिन होली के पूर्व ही उन्होंने अपने वतन की हिफाजत के लिए खून की होली खेलते हुए अमर जमानों की सूचि में अपना नाम दर्ज करा गये.बहरहाल मुन्ना की शहादत को खगड़िया सहित देश कभी भूल नहीं सकता.

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