Breaking News
IMG 20180208 WA0001

महायज्ञ के श्री कृष्ण जन्मोत्सव में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

खगड़िया :जिले के गोगरी प्रखंड के समसपुर स्थित जवाहर उच्च विद्यालय परिसर में परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित हो रहे 9 दिवसीय श्री विष्णु यज्ञ सह श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के चौथे दिन बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कार्यक्रम देखने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.इस अवसर पर संगीतमय कथा व्यास स्वामी श्री अनन्ताचार्य जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण अवतार पर चर्चा करते हुए कहा कि गज जीव हैं और ग्राह माया. माया से जीव को परमात्मा कृष्ण ही छुड़ाते हैं.जीवनरूपी समुद्र का मंथन देव व दानव जैसे दो प्रवृत्ति मिलकर करते हैं तो विष व अमृत आदि 14 रत्न निकलते हैं. भगवान वामन ने बलि पर कृपा बरसा दी. श्रीकृष्ण का पराकट्य समस्त जीव जगत के लिए परम कल्याणकारी है,क्योंकि अधर्म , अन्याय,अभियान,अत्याचार का शमन परमात्मा स्वयं करते हैं.कंस इतना अत्याचारी था कि उसने अपने पिता अग्रसेन को भी कारागार में डाल दिया.मुसीबत में इंसान का केवल भगवान ही साथ देते हैं.जबकि प्राणी मोह-माया और गृहस्त जीवन में फंसकर प्रभु को भूल जाता है.वहीं उन्होंने भगवान श्री कृष्ण और बलराम जन्म की कथा उपस्थित श्रद्धालुओं को सुनाते हुए कहा कि जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो अपने आप जेल के ताले खुल गए थे और साथ ही वासुदेव की बेडियां भी टूट गई.वासुदेव इस संसार के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण को एक टोकरी में लेकर यमुना नदी को पार कर यशोदा मां के घर नंदलाल के पास छोड़ जाते हैं. जिसकी कानो-कान खबर कंस को नहीं लग पाती है.कथा के बीच-बीच में भगवान श्रीकृष्ण के “गोकुल में आनंद भयों…जय कन्हैयालाल की…हाथी-घोड़ा-पालकी,जय कन्हैयालाल की” जैसे अनेकों भजन पर श्रद्धालुओं आनंदित होते रहे.मौके पर श्रद्धालुओं के बीच फल,मिठाई व मिश्री भी लुटाये जाते रहे.वहीं श्रद्धालुओं के ठुमके माहौल का भक्तिमय होने का एहसास कराती रही.इस अवसर पर धर्म मंच से लेकर श्रोता पंडाल को पूरी तरह सजाया गया था.ब्रज मंडल की झलक के दौरान फूलों की पंखुड़ियों की बारिश होती है और जमकर अबीर व गुलाल उड़ाये जाते हैं.

IMG 20180208 WA0000
महायज्ञ में श्री कृष्ण जन्मोत्सव

मौके पर स्वामी श्री अनन्ताचार्य जी महाराज ने भाष्यकार रामानुजार्य पर विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि चित-अचित ईश्वर का संबंध विशेष रूप से निरुपित करने वाला दर्शन ही विशिष्टता द्वैत दर्शन हैं. इस प्राचीन दर्शन को यथार्थ स्वरूप प्रदान कर जनकल्याण के लिए शेषावतार भाष्यकार भगवान रामानुजार्य जी के हजारों वर्ष पूर्व प्रतिपादित किया.वस्तुतः विश्व कल्याण कामना सर्वधर्मधुरी है.कुल मिला कर महायज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालु भक्ति-रस में खूब गोते लगाते हुए दिखे.

Check Also

Poster 2026 01 20 105637

DM ने कलाकारों को किया सम्मानित, मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दी पेंशन की सौगात

DM ने कलाकारों को किया सम्मानित, मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दी पेंशन की सौगात

error: Content is protected !!