Breaking News

जितिया 2 अक्टूबर को,इस वर्ष 30 घंटे का होगा निर्जला व्रत

लाइवखगड़िया(मुकेशकुमारमिश्र): भारतीय संस्कृति में आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी का विशेष महत्व है.इस दिन जिवित्पुत्रिका व्रत (जिउतिया) घर-घर में महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिये करती है. पौराणिक कथा के अनुसार जिमुत वाहन राजा ने गरुड़ से मुक्ति दिलाकर कई मृत पुत्रों को जीवित करवाया था.द्रौपदी अपने पुत्र की दीर्घायु के लिये जिवित्पुत्रिका व्रत रखी थी.जिसके बाद घर-घर में महिलाएं पुत्र की दीर्घायु हेतु महाअष्टमी जिवित्पुत्रिक व्रत करने ली.जिले के संसारपुर गांव निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर बताते हैं की इस वर्ष विश्व विद्यालय पंचांग के मुताबिक 01 अक्तूबर (सोमवार ) को महा अष्टमी व्रत धारण करने वाली महिलाएं दिन में नहाय खाय करेगीं औऱ संध्या में विशिष्ट भोजन ग्रहण किया जायेगा.रात्रि 02:44 बजे के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाती है और इसके पूर्व तक ही जल ग्रहण किया जा सकता है. इसके बाद अष्टमी व्रत प्रारंभ हो जाएगा.02 अक्तूबर मंगलवार की रात्रि 12:31 बजे तक अष्टमी तिथि है.इसलिए बुधवार प्रातःकाल पारण किया जाएगा.इस बीच वर्ती महिलाएं करीब 30 घंटे तक निर्जला उपवास पर रखेंगी.मान्यताएं है कि महाअष्टमी व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. व्रत धारण करने वाली महिलाएं बताती हैं कि पूजा के दौरान अखण्ड डाला में नारियल,खीरा,बांस के पत्ते,जियल के पत्ते,पान सुपारी,जनउ,द्रव्य,फल एवं पकवान भर कर लाल कपड़े से बांध दिया जाता है. डाला भरने का कार्यक्रम मंगलवार को दोपहर बाद किया जाएगा. व्रत तोड़ने के पहले संतान के द्वारा डाला को खोला जाता है.उसके बाद व्रती उपवास समाप्त करती हैं. संतान की दीर्घायु के लिए घर-घर में महिलाएं व्रत रखती हैं. संतान पर कोई बाधाएं नहीं आए तथा भगवान से उनकी लम्बी उम्र की कामना करती है.

व्रत कापहला दिन :

जितिया व्रत के पहले दिन को नहाई-खाई कहा जाता है.इस दिन महिलाएं प्रातःकाल जल्दी जागकर पूजा पाठ करती है औऱ विशिष्ठ भोजन प्राप्त करती है.

व्रत कादूसरा दिन :

व्रत के दूसरे दिन को खुर जितिया कहा जाता है.यह जितिया व्रत का मुख्य दिन होता है. इस दिन महिलाएं जल ग्रहण नहीं करती और पूरे दिन निर्जला उपवास रखती है.

व्रत कातीसरा दिन :

यह व्रत का आखिरी दिन होता है. इस दिन व्रत का पारण किया जाता है.वैसे तो इस दिन सभी कुछ खाया जाता है.लेकिन मुख्य रूप से झोड़-भात, नोनी का साग और मरुवा का रोटी सबसे पहले भोजन के रूप में ली जाती है.

कहते हैंपंडित :

पंडितों की मानें तो महाअष्टमी व्रत भक्तजनों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है तथा घर में सुख,-समृद्धि लाती है.जिउतिया की महाअष्टमी व्रत संतान की लम्बी आयु,बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक है.इस दौरान महिलाएं श्रद्धा भक्ति के साथ निराधार उपवास करती हैं.माँ अपने संतान की दीर्घायु के लिये कितनी कष्ट उठाती हैं इसका अंदाज लगाना संभव नहीं है.माँ का आशीर्वाद सदैव संतान के साथ रहता है.जिवित्पुत्रिका व्रत को लेकर बाजारो में चहल पहल तेज हो गई हैं.वहीं फलों की कीमत में भी तेजी आता जा रहा है औऱ साथ ही पर्व को लेकर घर-घर में भी तैयारियां जोरों पर है.

IMG 20180818 WA0025

Check Also

Poster 2026 01 25 075131

चुनावी सुधारों में खगड़िया अव्वल, DM नवीन कुमार राज्यस्तरीय ‘Best Electoral Practices Award’ के लिए चयनित

चुनावी सुधारों में खगड़िया अव्वल, DM नवीन कुमार राज्यस्तरीय 'Best Electoral Practices Award' के लिए चयनित

error: Content is protected !!