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कलश यात्रा के साथ ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला’ का भव्य आगाज़, भक्ति के रंग में रंगा कुल्हड़िया

लाइव खगड़िया : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वाधान में जिले के परबत्ता प्रखंड के कुल्हड़िया गांव में गुरुवार को ‘श्रीमद्भागवत गीता आध्यात्मिक रहस्य एवं द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेला’ का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत एक भव्य कलश यात्रा से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

गणमान्य अतिथियों ने किया दीप प्रज्वलन

संध्या काल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन खगड़िया के पुलिस अधीक्षक (SP) राकेश कुमार, डायल 112 पटना के SP मिथिलेश कुमार, पूर्व DDC रविकांत तिवारी, सेवानिवृत्त शिक्षक झाड़ीलाल साह और वरिष्ठ राजयोगिनी मीना दीदी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

आध्यात्मिक संबोधन: “गीता जीवन जीने की कला है”

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसपी राकेश कुमार ने कहा:

​”श्रीमद्भागवत गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दर्शन है। ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों को नैतिक मूल्यों की प्रेरणा मिलती है।”

​वहीं, डायल 112 के एसपी मिथिलेश कुमार ने अनुशासन और शांति के लिए आध्यात्मिक चेतना को अनिवार्य बताया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ें और जीवन को सही दिशा दें।

“विश्व में फिर बनी महाभारत जैसी परिस्थितियाँ” – राजयोगिनी कंचन दीदी

​मुख्य प्रवचनकर्ता राजयोगिनी कंचन दीदी ने वर्तमान वैश्विक हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज का समाज पुनः ‘महाभारत काल’ जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।

  • कौरव प्रवृत्ति का पुनरुत्थान: भूमि, संपत्ति और अधिकारों के लिए संघर्ष बढ़ रहा है।
  • मानवता का ह्रास: वासनाओं और विकारों के कारण नारी अस्मिता पर प्रहार हो रहा है, जो आधुनिक युग का ‘चीरहरण’ है।
  • परिवर्तन का समय: दीदी ने विश्वास दिलाया कि परमात्मा का अवतरण हो चुका है और वे विश्व परिवर्तन का कार्य कर रहे हैं। अब समय आत्मचिंतन और सद्गुणों की ओर लौटने का है।

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आध्यात्मिक मेले के मुख्य आकर्षण: दर्शन, प्रवचन और योग का संगम

आयोजन समिति ने बताया कि 31 जनवरी तक चलने वाले इस सात दिवसीय मेले में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जो मुख्य रूप से तीन केंद्रों पर आधारित हैं:

  • द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन (अलौकिक झांकी): भक्तों के लिए एक ही स्थान पर भारत के प्रतिष्ठित 12 ज्योतिर्लिंगों की भव्य और कलात्मक झांकी सजाई गई है। यहाँ श्रद्धालु प्रतीकात्मक रूप से द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर उनके पौराणिक महत्त्व को समझ सकेंगे।
  • श्रीमद्भागवत गीता रहस्य चर्चा: प्रतिदिन संध्या काल में आध्यात्मिक विशेषज्ञों द्वारा गीता के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला जाएगा। इसमें बताया जा रहा है कि कैसे गीता के सूत्र वर्तमान संघर्षपूर्ण जीवन में शांति और समाधान का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
  • राजयोग शिविर (मानसिक शांति का मार्ग): तनावमुक्त जीवन और एकाग्रता बढ़ाने के लिए विशेष राजयोग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसमें प्रशिक्षकों द्वारा सहज राजयोग के अभ्यास के माध्यम से मन को स्थिर करने और आत्मिक शक्ति को जाग्रत करने की विधि सिखाई जा रही है।

इस आयोजन में आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति व्यवस्था को सुचारू बनाने में जुटे हैं।

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