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टेमी दागने की परंपरा के साथ 13 दिवसीय मधुश्रावणी पूजा संपन्न

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : “चलू- चलू बहिना हकार पूरय लेय ,टनी दाय केवर एलय टेमी दागय लय”…मधुर मैथिली गीत के साथ मंगलवार को मिथिला संस्कृति का महान पर्व मधुश्रावणी पूजा सम्पन्न हुआ.पूजा के दौरान लगातार तेरह दिनों तक नवविवाहिता ने श्रद्धा व भक्ति के साथ महादेव,गौरी ,नाग, नागिन आदि का पूजन किया.इस क्रम में प्रति दिन नवविवाहिताओं के द्वारा शिव पार्वती, नाग नागिन, बिहुला बिषहरी,मैना गौरी,मंगला गौरी,बाल बसंत आदि से जुड़ी कथाओं का श्रवण किया गया और 13 दिनों तक भक्ति का माहौल बना रहा. IMG 20180814 WA0011

टेमी दागने कीपरंपरा केसाथ पर्व संपन्न :

13 दिवसीय पर्व के अंतिम दिन मंगलवार को पूजन काफी विधि-विधान तरीके से किया गया.इस दौरान नवविवाहिताएं को रूई की टेमी से हाथ, घुठना, पैर पर पान के पत्ते रखकर टेमी जलाकर दागा गया.नवविवाहिताओं के लिए यह अग्नि परीक्षा थी जो पति के दीर्घायु एवं अमर सुहाग की कामना के लिए किये जाने की परंपरा रही है.जबकि कुछ बुजुर्ग महिलाओं का मानना है कि टेमी दागने से पति-पत्नी के बीच मधुर सम्बन्ध बना रहता है.

पूजा केदौरान भाई का भीरहा विशेष योगदान :

पूजन प्रक्रिया में नवविवाहिताओं के भाई का भी बड़ा योगदान रहा. प्रत्येक दिन पूजा समाप्ति के बाद भाई अपनी बहन को हाथ पकड़ कर उठाती रहे.नवविवाहिताओं के द्वारा अपने भाई को इस कार्य के लिए दूध,फल आदि भेंट किया गया.IMG 20180814 WA0012

सुहागिन महिलाएं केबीच पकवानों सेभरी डाली कावितरण :

नवविवाहिताओं के द्वारा चौदह सुहागिन महिलाएं के बीच फल एवं पकवानों से भरी डाली प्रसाद के रूप में वितरण किया गया एवं ससुराल पक्ष के आए हुए बुजुर्ग लोगों से आशीर्वाद प्राप्त कर पूजन का कार्य सम्पन्न किया गया.पूजन के उपरांत ससुराल पक्ष से आये मिट्टी के बनाए हुए नाग,नागिन, हाथी आदि की प्रतिमा एवं फूल-पत्तियों का विसर्जन कार्य संध्या में किया गया.जिसके उपरांत बाद नवविवाहिताओं के द्वारा नमकयुक्त भोजन ग्रहण किया गया.

बरकरार रही पुरानी परंपरा :

सदियों से चली आ रही मिथिला संस्कृति का महान पर्व नवविवाहिताओं के द्वारा पूरी श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया गया.इस दौरान महिलाएं समूह में मैथिली गीत गाकर भोले शंकर को खुश करती रहीं.साथ ही आने वाले पीढ़ी को इस परंपरा को बरकरार रखने का संदेश देंती रहीं.पर्व के दौरान ना सिर्फ मिथिला संस्कृति की बल्कि भारतीय संस्कृति की भी झलक देखने को मिलती रही.पूजन के दौरान भारतीय संस्कृति के वस्त्र व श्रृंगार से झलकती रहीं.पूजनोत्सव कार्यक्रम सिर्फ मिथिला व बिहार में ही नहीं बल्कि अन्य प्रदेशों में रहने वाली नवविवाहिताओं के द्वारा भी मनाया गया.सविता झा के अनुसार अखिल भारतीय मिथिला संघ मैथिलानी समूह द्वारा मधुश्रावणी पाबनि उत्सव दिल्ली में भी मनाया गया.साथ ही उन्होंने बताया कि सशक्त मैथिलानी द्वारा अपनी परंपरा संस्कृति संरक्षण हेतु विशाल आयोजन किया गया.जिसमें बिहार की सैकड़ो महिलाओ ने भाग लिया.IMG 20180729 WA0009

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