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नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा,मनसा देवी स्थान में मेला का आयोजन

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लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिले में श्रद्धा व भक्ति के साथ सोमवार को नाग पंचमी की पूजा की गई. पूजा के क्रम में उपासक अपने घर के दहलीज के दोनों तरफ गोबर से पांच सिर वाले नाग की आकृति बनाया. इसके बाद नागदेवता को दूध , लावा, फूल, अक्षत, लड्डू चढ़ाया गया. जबकि पूजा अर्चना के बाद संध्या में उपासक अपने-अपने घरों में लावा बिखेर नागदेवता का आह्वान किया.

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जिले के चौथम प्रखंड के पूर्वी बौरने पंचायत के अति प्राचीन मां भगवती मनसा देवी  बौरने स्थान में  नागपंचमी के दिन सदियों से चली आ रही परंपरा के तहत विशेष पूजा-पाठ किया गया. कोसी एवं बागमती के बीच अवस्थित मां भगवती मनसा देवी के प्रागंण में एक दिवसीय नाग पंचमी मेले का भव्य आयोजन किया गया. जहां श्रद्धालुओं के द्वारा पूजा-अर्चना के साथ-साथ दूध और धान का लावा चढाया गया. वहीं कुछ भक्त गाजे-बाजे के साथ मां के दरबार में  पहुंचकर पूजा किया.

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मौके पर पंडित हरिवंश पाठक एवं स्थानीय बुजुर्ग ग्रामीणों ने बताया कि नागपंचमी के दिन सैकड़ों वर्षों से यहां माता कि पूजा विशेष  रुप मे होती आ रही है और सर्प विधा के तांत्रिक यहां अपना मंत्र सिद्ध करते हैं.

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दूसरी तरफ जिले के अन्य विषहरी मंदिर में भी नाग पंचमी के अवसर पर  नागदेवता का विशेष पूजा-अर्चना किया गया. मान्यता रही है कि इस दिन नागदेव का दर्शन अवश्य करना चाहिए और नाग हमारी संस्कृति का एक अलग हिस्सा है. नागदेवता भगवान शिव के गले में आभूषण के रुप में लिपटे रहते हैं. भगवान विष्णु जी शेष नाग की शय्या पर ही शयन करते हैं. बताया जाता है कि जब-जब भगवान का पृथ्वी पर अवतार हुआ है तो शेष नाग भी उनके साथ अवतरित हुआ है. पौराणिक कथा के अनुसार एक बार मातृ शाप से नागलोक जलने लगा था. तब नागों की दाह पीड़ा श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन शांत हुआ और उसी दिन से नाग पंचमी पर्व मनाया जाने लगा.


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