लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : पूराने जमाने में गेहूं पीसने के लिए हाथ चक्की का व्यवहार किया जाता था.तकनीक के विकसित होने के साथ लोगों को सुविधा मिली और वो इस कार्य के लिए विद्युत या जनरेटर चलित आटा चक्की पर पहुंचने लगे.अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं पीसने की पोर्टेबल मशीन घर-घर पहुंचने लगी है.जिससे लोगों को समय की बचत के साथ काफी सुविधाएं मिल रही है.लेकिन थोड़ी सी असावधानी से जुगाड़ तकनीक से बनी पोर्टेबल आटा मशीन दुर्घटनाओं को भी आमंत्रण देता प्रतित होने लगा है.बीते ही दिनों दो अलग-अलग घटनाओं में जिले के परबत्ता प्रखंड में ट्रेक्टर युक्त पोर्टेबल आटा चक्की मशीन के फटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि हादसे में दो अन्य बुरी तरह घायल हो गये.घायलों में से एक नयागांव वीरपुर टोला निवासी नवीन चौधरी आज जिंदगी व मौत से जूझ रहे हैं.

बताया जाता कि पोर्टेबल आटा चक्की मशीन ट्रैक्टर से चलती है.जिसकी कीमत लगभग 75 हजार की आती है.यदि ट्रैक्टर की कीमत को भी शामिल कर लिया जाये तो इस व्यवसाय के लिए लगभग पांच से छह लाख रुपए खर्च करने की जरूरत होती है.
जानकार बताते हैं कि मशीन की मदद से एक घण्टे में लगभग ढाई क्विंटल गेहूं की पिसाई की जा सकती है.लेकिन इसके संचालन के लिए कुछ तकनीकी पहलूओं की भी जानकारी जरूरी है.अमूमन जानकारी के आभाव में पोर्टेबल मशीन हादसाओं को जन्म दे रहा है.जिसमें ट्रेक्टर की चाल पर कंट्रोल को काफी अनिवार्य बताया गया.साथ ही बताया गया कि ट्रेक्टर से आटा चक्की मशीन को जोड़ने के लिए प्रशिक्षित कारीगरों की जरूरत होती है.साथ ही अकुशल कारीगरों के द्वारा कार्य लिए जाने को हादसा के कारणों की एक बड़ी वजह बताया गया.वहीं आंटा चक्की मशीन चालू करने के पूर्व विभिन्न मिशनरी पार्टस को अच्छी तरह से जांच करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया.
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