लाइव खगड़िया: जिले के गोगरी प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय कटघरा में कार्यरत नियोजित शिक्षक प्रेमशंकर कुमार पर फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई है।
क्या है पूरा मामला?
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी शिक्षक प्रेमशंकर कुमार ने वर्ष 2006 में गोगरी प्रखंड की ग्राम पंचायत राज इटहरी से नियोजन के दौरान फर्जी प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल किया था।
नियोजन के वक्त उन्होंने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की वर्ष 1994 की इंटर परीक्षा में 595 अंक (66 प्रतिशत) प्राप्त कर उत्तीर्ण होने का दावा किया था। हालांकि, जब निगरानी ब्यूरो ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मूल अभिलेखों से उनके प्राप्तांकों का मिलान किया, तो मामला पूरी तरह फर्जी निकला।
जांच में पता चला कि संबंधित रोल कोड और रोल नंबर पर अभ्यर्थी को केवल 258 अंक ही प्राप्त हुए थे और वे अनुत्तीर्ण थे। आरोपी शिक्षक ने मूल अंकपत्र में छेड़छाड़ कर 258 अंकों को 595 अंक दर्शाते हुए फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार किया था और इसी के आधार पर नौकरी हासिल की थी।
पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर हो रही है जांच
राज्य में नियोजित शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर कराई जा रही है। इसी क्रम में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने विभिन्न जिलों में शिक्षकों के शैक्षणिक व प्रशैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन शुरू किया है, जिसके तहत यह बड़ी कार्रवाई सामने आई है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस निरीक्षक सह जांच अधिकारी मो. सलाहउद्दीन खान ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को पत्र भेजकर आरोपी शिक्षक के विरुद्ध तत्काल विभागीय कार्रवाई शुरू करने की अनुशंसा की है।
इसके साथ ही, पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़ा और नियोजन प्रक्रिया में कौन-कौन से अज्ञात बिचौलिए और अन्य लोग शामिल थे। आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी सेवा प्राप्त करने के साथ-साथ वर्षों तक वेतन के रूप में सरकारी राशि का भी लाभ उठाया है। ब्यूरो ने गोगरी थाने में आरोपी शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है।






