लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : शिक्षा व्यवस्था की संवेदनहीनता और नियति की मार ने दो छात्राओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। परबत्ता थाना क्षेत्र के माधवपुर गांव में हुई एक सड़क दुर्घटना के बाद, इंटरमीडिएट की परीक्षा देने जा रही दो छात्राओं को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला। विडंबना यह रही कि छात्राएं केंद्र के गेट तक तो पहुँचीं, लेकिन महज एक मिनट की देरी ने उनके साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया।
हादसे में घायल, फिर भी हौसला लेकर पहुँचीं केंद्र
जानकारी के अनुसार, डुमरिया बुजुर्ग स्थित पंडित सरयुग हजारी प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय की छात्रा मीनाक्षी कुमारी और संत विनोबा भावे कॉलेज भरतखंड की छात्रा साक्षी कुमारी अपने चाचा अंकेश राय के साथ मोटरसाइकिल से परीक्षा केंद्र जा रही थीं। उनका केंद्र इंटर भगवान हाई स्कूल, गोगरी जमालपुर में था।
माधवपुर गांव के पास मोटरसाइकिल और स्कूटी की टक्कर में तीनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में मीनाक्षी और उनके चाचा को काफी चोटें आईं। दर्द से कराहते हुए भी दोनों छात्राएं परीक्षा देने के संकल्प के साथ केंद्र पहुँचीं, लेकिन वहाँ उन्हें नियमों की दीवार का सामना करना पड़ा।
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नियमों की सख्ती के आगे बेबस हुई संवेदना
परिजनों का आरोप है कि परीक्षा शुरू होने में मात्र एक मिनट की देरी हुई थी। छात्राओं ने अपनी चोट और दुर्घटना का हवाला देते हुए प्रवेश की गुहार लगाई, लेकिन केंद्र प्रशासन ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। “एक ओर सड़क दुर्घटना की मार और दूसरी ओर साल बर्बाद होने का सदमा छात्राओं की आंखों के आंसू सिस्टम की बेरुखी की गवाही दे रहे थे।”
अस्पताल में भर्ती हैं घायल
परीक्षा से वंचित होने के बाद घायल छात्रा मीनाक्षी की स्थिति बिगड़ने पर उसे बेहतर इलाज के लिए बेगूसराय रेफर किया गया है। वहीं, गंभीर रूप से घायल चाचा अंकेश राय का भी इलाज जारी है। इस घटना ने स्थानीय लोगों और परिजनों में आक्रोश भर दिया है। लोगों का कहना है कि क्या आपातकालीन स्थितियों में शिक्षा व्यवस्था में थोड़ी भी लचीलापन या मानवीय संवेदना की जगह नहीं है?






