लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र): “मंजिल भले ही बदली, लेकिन हौसला नहीं टूटा।” इस कहावत को जिले के एक युवा ने सच साबित कर दिखाया है। जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत माधवपुर गांव निवासी रौशन कुमार ने विपरीत परिस्थितियों में हार मानने के बजाय स्वरोजगार की मिसाल पेश की है। सेना में जाने का सपना पूरा न होने पर उन्होंने निराश होने के बजाय खुद का व्यवसाय शुरू किया और जिले के इकलौते कमर्शियल बत्तख पालक बन गए हैं।
5 लाख की पूंजी और 500 बत्तखों के साथ शुरुआत
रौशन कुमार ने अपने इस नए व्यवसाय की शुरुआत कुल 500 बत्तखों के साथ की है। इसके लिए उन्होंने बिहार के सीतामढ़ी जिले से बत्तख मंगाई हैं, जिसमें 45 हजार (450) फीमेल और 50 मेल बत्तख शामिल हैं। इस पूरे स्टार्टअप में उन्होंने लगभग पांच लाख रुपये की पूंजी निवेश की है।

बत्तखों को प्राकृतिक और अनुकूल वातावरण देने के लिए उन्होंने अपने स्तर से एक छोटा पोखर भी तैयार कराया है, जिससे उनके पालन-पोषण में किसी प्रकार की परेशानी न हो। उनका यह अनूठा प्रयास फिलहाल पूरे खगड़िया जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
फौजी बनने का सपना छूटा, तो स्वरोजगार को बनाया हथियार
रौशन का सपना देश सेवा के लिए फौज में जाने का था। इसके लिए उन्होंने जी-जान से कड़ी मेहनत और तैयारी भी की थी, लेकिन सफलता न मिलने पर वे मायूस नहीं हुए। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी की हार मानने के बजाय एक नई शुरुआत का अवसर माना।
उनका उद्देश्य केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाना ही नहीं है, बल्कि भविष्य में इस व्यवसाय को और विस्तार देकर क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करना है।
युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा
रौशन कुमार की यह पहल समाज में एक मजबूत संदेश देती है कि सरकारी नौकरी ही सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं है। यदि लगन, कड़ी मेहनत और सही दिशा में पक्का इरादा हो, तो युवा स्वरोजगार और बिजनेस के जरिए भी अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं और आर्थिक रूप से मजबूत हो सकते हैं।
माधवपुर के इस युवा का 500 बत्तखों से शुरू हुआ यह सफर आने वाले दिनों में सफलता के किस मुकाम पर पहुंचता है, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन उनकी यह शुरुआत हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो असफलताओं से घबराकर बैठ जाते हैं।






