लाइव खगड़िया: जिले के परबत्ता प्रखंड के मुरादपुर गंगा तट पर प्रकृति का एक ऐसा हैरान करने वाला रूप देखने को मिला है, जो क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बन गया है। यहाँ गंगा के भीषण कटाव के कारण जमीन पूरी तरह बह चुकी है, लेकिन एक पुराना आम का पेड़ आज भी हवा में लटकी हुई अपनी विशाल और उलझी जड़ों के सहारे सीना ताने खड़ा है।
कलाकृति जैसा दिखता है जड़ों का जाल
माधवपुर के रहने वाले रामानंद झा के पारिवारिक बगीचे का यह पेड़ अब किसी अजूबे से कम नहीं लगता। दूर से देखने पर इसकी हवा में फैली जड़ें किसी पेशेवर मूर्तिकार द्वारा तराशी गई जालीदार गुफा या कलाकृति जैसी प्रतीत होती हैं। गंगा की तेज धाराओं ने भले ही इस पौधे की नीचे की पूरी मिट्टी लील ली हो, पर इसने हार नहीं मानी।

गंगा की लहरों ने छीनी मिट्टी
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बीते सालों में गंगा की तेजधारा और लगातार हुए भीषण मिट्टी के कटाव ने पेड़ के नीचे की पूरी जमीन बहा दी।
बिना मिट्टी के भी लदते हैं रसदार आम
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस अनोखे पेड़ की जीवनक्षमता पर इस आपदा का कोई असर नहीं पड़ा है। आज भी हर साल मौसम आने पर इसकी डालियाँ मीठे और रसीले आमों से भर जाती हैं। इस प्राकृतिक संघर्ष को देखने और कैमरे में कैद करने के लिए दूर-दूर से राहगीर और पर्यटक इस तट पर पहुँच रहे हैं।






