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मन में आए विचार जब लेने लगती हिलोरें तो बन आती है कविता

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लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : उत्तर, पूर्वी व दक्षिण बिहार, झारखंड, बंगाल, असम, उड़ीसा और नेपाल के तराई जैसे प्राचीन अंग महाजनपद के इलाक़ों में ‘अंगिका’ मुख्य रूप से बोली जाने वाली भाषा है और इसकी एक अलग पहचान है. आज के दौर में अंगिका भाषा में काव्य को लेकर 32 वर्षीय युवा अंगिका लेखक सह कवि डॉ मनजीत  कुमार सिंह सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. शम्भू भूषण सिंह व माला देवी क पुत्र  डॉ मनजीत कुमार सिंह मूल रूप से मुंगेर जिले के महिमाचक के निवासी  है. लेकिन उनकी प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल खगड़िया जिले के सियादतपुर अगुवानी पंचायत के  मध्य विद्यालय अगुवानी एवं बिहार केसरी एवं मोती हजारी उच्च विद्यालय डुमरिया बुजुर्ग में हुआ है. उनहेंने पीएचडी की डिग्री तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से एवं प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से संगीत की डिग्री प्राप्त की है. एमए में वे स्वर्ण पदक भी प्राप्त कर चुके हैं. फिलहाल डॉ मनजीत कुमार सिंह मारवाड़ी महाविद्यालय भागलपुर में अतिथि व्याख्याता के रुप में कार्यरत हैं. 

डॉ मनजीत कुमार सिंह के द्वारा रचित दोहा, गीत, गजल, मुकरियां, माहिया, नाटक, कहानी सुर्खियां बटोर रही है. उनके शब्द में गांव की आंचलिक मिठास से लोगों को प्रभावित कर रहा है. “कोर कसर जौं रही गेल्हों, नौकरी के तैयारी में…इज्जत फिर ते नहिंये मिलथौं जीवन भर ससुरारी में”, “प्राइवेट शिक्षा से गार्जियन होलो छै लाचार…अंगरेजी के फेरो में हिन्दीयो भेलैय पार “, “युवा रोजगार ले काटय रोज बबाल छै…अच्छा दिन एइलो ई  कमाल छै” जैसे अंगिका की कविता को हजारो लोगों के द्वारा सराहा जा रहा है.


डॉ मनजीत कुमार सिंह बताते हैं कि अंगिका के महान कवि सुमन सूरो उनके लिए प्रेरणा श्रोत है. साथ ही वो कहते है कि उनकी रचना उनके मन में आये उन विचारों की अभिव्यक्ति है जिसे वे स्वयं और पाठकों के बीच प्रस्तुत कर रहे है. वो कहते हैं कि मन में आए विचार जब हिलोरें लेने लगती हैं तो वह स्वतः शब्दों के माध्यम से किसी न किसी साहित्यिक विधा कां रूप ग्रहण कर लेती है. साथ ही वो कहते हैं कि यदि उनकी साहित्यिक अभिव्यक्ति समाज में सकारात्मक भूमिका अदा करे तो वो अपने कार्य को सार्थक समझेंगे. 

डॉ मनजीत कुमार सिंह ‘सतरंग के युवा कवि’(भागलपुर), दोहा श्री (साहित्य शारदा मंच, खटीमा, उत्तराखंड ) पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं. वे  “बालमन’ पत्रिका का संपादक एवं “संग्राम” पत्रिका के उपसंपादक भी रह चुके हैं.

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अगुवानी निवासी शिक्षक, कवि सह शायर  विकास सोलंकी बताते हैं कि अंगिका साहित्य का डॉ  मनजीत कुमार सिंह प्राध्यापक व एक सशक्त साहित्यकार हैं, जो अपनी लेखनी से पारिवारिक संबंध, सामाजिक समस्या, गरीबी, युवाओं की बेरोजगारी, प्राकृतिक आपदा, सियासत की दशा व दिशा जैसे समाज के तमाम पहलुओं पर  बिना लाग लपेट के अपनी बातों को कविता के माध्यम से करतो हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि यूं तो उनकी लेखनी हिंदी की अनेक विधाओं में चलती है, लेकिन मातृभाषा अंगिका के प्रति भी उनका गहरा प्यार जग जाहिर है.

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