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समबाहु त्रिभुज के तीन बिन्दुओं पर विराजमान हैं ये तीन देवियां




लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित चौथम प्रखंड अंतराल रोहियार पंचायत के बंगलिया गांव (धमारा घाट) में  मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी का मंदिर है. कोसी ओर बागमती के बीच में अवस्थित मां कात्यायनी मंदिर की महिमा अगम अपार है. मान्यता है कि माता भक्तजनों की मन्नतें पूर्ण करती हैं.




इस मंदिर के संदर्भ में एक कथा प्रचलित है कि चौथम के राजा मंगल सिंह एवं सिरपत महाराज दोनों मित्र थे. बताया जाता है सिरपत महाराज हजारों पशुओं का मालिक थे. कहा जाता है कि गाय चराने के क्रम में वर्तमान मंदिर वाले स्थान पर स्वतः दूध का स्राव होने लगता था. जिसे देखकर सिरपत महाराज को भी आश्चर्य हुआ और यह बात कानों कान फैल गई. उधर चौथम के राजा मंगल सिंह को भी मां ने स्वप्न दिया. जिसके बाद दोनों मित्र ने उक्त स्थल की खुदाई करवाई तो वहां माता का बायां हाथ मिला और फिर वहां सन् 1596 ई. में वहां मंदिर का निर्माण करवाया गया.




हिन्दू धर्म के अनुसार जहां-जहां सती देवी के शरीर का अंग गिरा वहां-वहां शक्ति पीठ बन गई. जो पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैला हुआ है. इसी कड़ी में सती देवी का बायां हाथ जिले के रोहियार पंचायत के बंगलिया गांव में गिरा था. जो मां कात्यायनी शक्ति पीठ के नाम से विख्यात है. मां कात्यायनी स्थान 51 शक्तिपीठो में एक है. दूध की देवी मां कात्यायनी मंदिर में दूध चढाने की विशेष परंपरा है. सिर्फ कोसी इलाके में ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के पशुपालको के गाय जब बच्चा देती है तो उसका पहला दुध मां कात्यायनी स्थान मंदिर में चढाया जाता है. इस मंदिर को लेकर एक खास विशेषता यह भी रही है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता को दूध चढाने के लिए संकल्प लेकर आता है उसका दूध खराब नहीं होता है. प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को वैरागन का दिन है. उस दिन मंदिर में आपार भीड़ होती है. मान्यता है कि दूध चढाने से पशुपालकों का पशु स्वस्थ रहता है.

शक्ति पीठ मां कात्यायनी मंदिर से सहरसा जिले के सोनवर्षा प्रखंड के विराटपुर में अवस्थित मां चण्डी देवी एवं महिषी में अवस्थित शक्ति पीठ मां तारा देवी की दूरी एक दूसरे से समान है एवं तीनों ही देवी एक समबाहु त्रिभुज के तीन बिंदुओं पर विराजमान है. जिसकी अपनी एक अलग महत्ता है.


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