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खगड़िया

सिविल सर्जन कार्यालय से ऑडिट रिपोर्ट की फाइल गायब, सूचना आयोग का FIR दर्ज करने का आदेश

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लाइव खगड़िया: दैनिक अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिविल सर्जन कार्यालय से वर्ष 2013-14 के महालेखाकार के ऑडिट निरीक्षण प्रतिवेदन (संख्या 396/2013-14) की फाइल गायब होने का गंभीर मामला सामने आया है। सूचना आयोग ने इसे जानबूझकर गायब किए जाने की आशंका जताते हुए जिम्मेदार कर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

सूचना आयोग की सख्त टिप्पणी: राज्य सूचना आयुक्त प्रकाश कुमार ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ऑडिट से जुड़ी अनियमितताओं को छिपाने के लिए फाइल को जानबूझकर गायब किया गया है। आयोग ने सिविल सर्जन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है।

एफआईआर और व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश: आयोग ने फाइल रखरखाव के लिए जिम्मेदार सभी संबंधित लिपिकों और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, सिविल सर्जन को आगामी 11 सितंबर को होने वाली सुनवाई में तथ्यात्मक प्रतिवेदन के साथ स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया है।

10 साल पुराना है मामला: यह पूरा विवाद जिले के आरटीआई कार्यकर्ता शैलेंद्र सिंह द्वारा वर्ष 2016 में मांगी गई सूचना से जुड़ा है। तय समय में जानकारी न मिलने पर उन्होंने आयोग में अपील दायर की थी (वाद संख्या ए-8671/2017)। लंबी सुनवाई और 7 जुलाई 2026 को सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा संचिका उपलब्ध न होने की बात कहे जाने के बाद आयोग ने यह सख्त कदम उठाया है।

मृत लिपिक पर डाला गया जिम्मा: मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सिविल सर्जन कार्यालय ने सफाई दी है कि अभिलेखों की तलाश के लिए कई लिपिकों से पत्राचार किया गया। सेवानिवृत्त लिपिक विनय कुमार मिश्र ने बताया कि फाइल तत्कालीन लिपिक राजेंद्र कुमार सिन्हा के पास थी, जिनका 31 अगस्त 2025 को निधन हो चुका है।

ऑडिट आपत्ति का विलोपन: रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय अपर निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं (मुंगेर प्रमंडल) ने आयोग को बताया कि बिना संबंधित अभिलेखों की जांच किए यह बताना संभव नहीं है कि वित्तीय नियमों का पालन हुआ था या नहीं, क्योंकि यह मामला महालेखाकार की ऑडिट आपत्ति के विलोपन से जुड़ा हुआ है।

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