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खगड़िया में राष्ट्रीय महिला परिषद – ओजस्विनी का प्रांतीय प्रशिक्षण वर्ग संपन्न, सैकड़ों बहनों ने ली आत्मरक्षा की ट्रेनिंग

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लाइव खगड़िया: अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद – उत्तर बिहार प्रांत के तत्वावधान में राष्ट्रीय महिला परिषद – ओजस्विनी का एक दिवसीय प्रांतीय प्रशिक्षण वर्ग रविवार को बाजार समिति रोड स्थित श्री राम भवन में उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सैकड़ों महिलाओं और युवतियों ने भाग लेकर आत्मरक्षा, अनुशासन और आत्मविश्वास का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

दीप प्रज्वलित कर हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ भारत माता और श्रीराम दरबार के चित्र पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
प्रमुख अतिथि: ओजस्विनी की केंद्रीय अध्यक्ष सुश्री रजनी ठकुराल, अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री सुरेन्द्र सिंह, हिन्दू हेल्पलाइन उत्तर बिहार के प्रांत अध्यक्ष नितिन कुमार, और ओजस्विनी उत्तर बिहार की प्रांत अध्यक्ष श्रीमती अनीता देवी।
विशेष उपस्थिति: प्रांत उपाध्यक्ष जवाहर झा, रंजीत सिंह, पंकज सिंह, महेंद्र यादव, सतीश झा एवं जिला अध्यक्ष नीरज सिंह, महामंत्री संजय वर्मा, मंत्री सन्नी गुप्ता सहित कई अन्य कार्यकर्ता।
अतिथियों का स्वागत जिला संगठन के पदाधिकारियों द्वारा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित करके किया गया।

आत्मरक्षा प्रशिक्षण बना मुख्य आकर्षण

प्रशिक्षण वर्ग के दूसरे सत्र में उपस्थित बहनों को आपातकालीन एवं विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें मुख्य रूप से शामिल थीं:
दंड प्रहार
तीर-धनुष चलाना
एयर गन का अभ्यास
मार्शल आर्ट के गुर
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में विषम परिस्थितियों के दौरान सजग रहने, आत्मविश्वास बनाए रखने और अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना था।

“नारी अबला नहीं, शक्ति का स्वरूप”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को कभी अबला नहीं, बल्कि शक्ति का स्वरूप माना गया है। भारतीय परंपरा की वीरांगनाओं ने हमेशा साहस, त्याग और आत्मसम्मान की मिसाल पेश की है।

“जिस नारी में संस्कार है, उसके हाथों में सामर्थ्य भी होना चाहिए। आत्मरक्षा का प्रशिक्षण किसी भय का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सजगता और स्वाभिमान का प्रतीक है।”

ओजस्विनी के इस प्रांतीय प्रशिक्षण वर्ग ने “संस्कार से चरित्र, संगठन से शक्ति और आत्मरक्षा से आत्मविश्वास” का सशक्त संदेश दिया। अंत में मातृशक्ति से सनातन संस्कृति, समाज सेवा और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम की सफलता में अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद और ओजस्विनी परिवार के सभी कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही।

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