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रूढ़ीवादी परंपराओं के बंधन को तोड़ते हुए बेटी ने दी पिता को मुखाग्नि

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लाइव खगड़िया (मनीष कुमार) : वक्त बदल रहा हैं और साथ ही समाज की सोच भी बदल रही है. जिले में परंपराओं से हटकर एक बेटी ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया. बताया जाता है कि मृतक का कोई बेटा नहीं था बल्कि दो बेटियां ही थीं. मंगलवार को श्मशान पर उस समय लोगों के आंसू छलक पड़े, जब एक बेटी ने रूढ़ीवादी परंपराओं के बंधन को तोड़ते हुए अपने पिता का अंतिम संस्कार किया और बेटा बनकर हर फर्ज को पूरा किया. वो पिता के अंतिम संस्कार के दौरान रोती रही, पापा को याद करती रही और बेटे की कमी को हर तरह से पूरा करने की कोशिश करती रही. 


दरअसल ऐसी बातें कही जाती हैं कि बेटा कुल का दीपक होता हैं, बेटे के बिना माता-पिता को मुखाग्नि कौन देगा ? लेकिन अब यह बातें बीते जमाने की हो गई, यह साबित किया अभिज्ञा ने. अभिज्ञा ने ना सिर्फ पिता को मुखाग्नि दी बल्कि अंतिम संस्कार की हर वह रस्म निभाई, जिनकी कल्पना कभी एक पुत्र से की जाती थी. 


जिले में बुधवार को एक बार फिर पुरानी कुरीति टूटी है. दरअसल जिले के चौथम थाना क्षेत्र के एनएच 107 पर नवटोलिया के समीप मंगलवार को सड़क दुर्घटना में मिडिल स्कूल, सोनवर्षा उत्तरी के हेडमास्टर उमेश पासवान की मौत हो गई थी. घटना से घर सहित उनके गांव रूपनी में कोहराम मच गया. हेडमास्टर उमेश पासवान को सिर्फ दो पुत्री है. जिसमें से एक पुत्री अभिलाषा की शादि हो चुकी है. जबकि छोटी पुत्री अभिज्ञा नवमी कक्षा की छात्रा है. अभिज्ञा ने अपने पिता की मौत के बाद उन्हें मुखाग्नि देकर असमंजस में परे समाज को एक नई दिशा दिखा दी.

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