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…जब कुमारी कन्याओं की हंसी से गूंज उठता है मंदिर परिसर

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लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : शारदीय नवरात्रा में कुमारी कन्या पूजन का विशेष महत्व है. मान्यता है कि मां दुर्गा कुमारी कन्या के रूप में ही अवतार लिया था.  जो सर्वशक्तिमान हैं. जिले के परबत्ता प्रखंड के बिशौनी स्थित चर्चित सिद्धपीठ चतुर्भुजी दुर्गा मंदिर की कुमारी कन्या पूजन भी खास है. मंदिर के पंडित डाक्टर प्राण मोहन कुंवर एवं आचार्य उत्कर्ष गौतम उर्फ रिंकु झा बताते हैं कि दस वर्ष से कम उम्र की कुमारी कन्याएं मां दुर्गा के रूप में जानी जाती हैं और वो पूजनीय हैं. क्योंकि मां दुर्गा की साक्षात् कृपा उनके उपर विराजमान रहती है. साथ ही उनलोगों के द्वारा बताया गया कि नवमीं के दिन मंदिर में करीब दो दर्जन से अधिक कुमारी कन्या को भक्तजन नए कपड़े सै सुशोभित करते हैंं और माँ दुर्गा की प्रतिमा के सामने उन्हें कतारबद्ध कर उनके पैरों पर जल, फूल आदि चढाया जाता है. इस क्रम में विधि-विधान से कुमारी कन्या का पूजन किया जाता हैं.




कुमारी कन्या पूजन होता बेहद खास

कुमारी कन्या को सिन्दुर का टीका लगाने के बाद खोइछा भरने की परंपरा रही है. जिसमें कई प्रकार के मिष्ठान एवं द्रव्य होते हैं. बताया जाता है कि इस मंदिर में खोइछा भरने के लिये भी भक्तजनों की अपार भीड़ उमड़ पडती है और कतार में रहकर भक्तजन कुमारी कन्या का खोईछा भरते हैं. साथ ही पूजन के अंतिम क्षण सैकड़ों श्रद्धालु हाथ जोड़कर कुमारी कन्याओं से हंसने की विनती करते हैं. वहीं कुमारी कन्या की हंसी से मंदिर परिसर गूंज उठता हैं. जिसे दुर्गा रूपी कन्या का आशीर्वाद माना जाता है और इस आशिर्वाद के लिए मंदिर में भक्तजनों की भीड़ उमड़ पडती है. दूसरी तरब बिशौनी गांव में शारदीय नवरात्रा के अवसर पर प्रत्येक दिन घर-घर में कुवारी कन्या एवं ब्रह्माण भोजन करवाने की भी परंपरा रही है.

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 विजया दशमी के दिन फुलाईस

चतुर्भुजी दुर्गा मंदिर, बिशौनी में विजयादशमी के दिन सुबह सिद्धी योग में फुलाईस का कार्यक्रम किया होता है. इस क्रम में मां आशीर्वाद के रूप में अपने भक्तों को पुष्प अर्पण करती हैं. जिसे पाने के लिये भक्त झोली फैलाये रहते हैं. लेकिन यदि मां भक्तों के प्रति खुश नहीं हो तो उनके  हाथों से पुष्प भक्तों की झोली में नहीं जाता है. वहीं कई बार ऐसा नाजारा भी दिखता है जब माँ का आशीर्वाद नहीं मिलने पर भक्त रोते हुए माँ की जयकार लगाते रहते हैं. बावजूद इसके उन्हें मां से पुष्प रूपी आशिर्वाद उन्हें नहीं मिल पाता है.


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