लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : त्रिवेणी उत्तरवाहिनी गंगा तट स्थित ऐतिहासिक अगुवानी घाट पर लगने वाले प्रसिद्ध माघी पूर्णिमा मेले को राज्यस्तरीय पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। जिला प्रशासन ने इस करीब 100 वर्ष पुराने मेले को बिहार राज्य मेला प्राधिकरण में शामिल करने की अनुशंसा की है।
समाहरणालय की जिला राजस्व शाखा द्वारा 20 मई 2026 को जारी पत्र में मेले के धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया गया है। गोगरी अनुमंडल पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है।
मेले से जुड़े मुख्य बिंदु
अवधि में विस्तार: स्थानीय विधायक बाबूलाल शौर्य के प्रयासों से वर्ष 2026 से इस मेले की अवधि को 2 दिन से बढ़ाकर 10 दिन कर दिया गया है।
प्रमुख आयोजन: मेले के दौरान रामधुनी यज्ञ, प्रवचन, अखाड़ा और घुड़दौड़ सहित विभिन्न सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
श्रद्धालुओं की भीड़: माघी पूर्णिमा के अवसर पर उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान के लिए लगभग दो लाख श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
भूमि का विवरण: यह मेला मौजा तेमथा/पटपर स्थित करीब 25 एकड़ सरकारी (गैरमजरुआ खास) भूमि पर आयोजित होता है, जिसकी सीमाएं जीपीएनओ बांध, रिंग बांध, खेसरा संख्या 477 और अगुवानी-सुल्तानगंज पुल मार्ग से जुड़ी हैं।
बिहार राज्य मेला प्राधिकरण से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद इस सदियों पुरानी परंपरा को एक नया प्रशासनिक और सांस्कृतिक मंच मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।






