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चौथम

खगड़िया की मूक-बधिर बेटियां रच रहीं सफलता की इबारत, हौसलों से दे रही हैं सपनों को उड़ान

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लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र): जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, चौथम की 25 मूक-बधिर बेटियां अपनी मेहनत और प्रतिभा से यह साबित कर रही हैं कि सपनों को पूरा करने के लिए आवाज की नहीं, बल्कि बुलंद हौसलों की जरूरत होती है। वर्ष 2008 में स्थापित इस विद्यालय में 2015 से विशेष रूप से मूक-बधिर बच्चियों की पढ़ाई शुरू की गई थी।

विशेष शिक्षण तकनीक और सांकेतिक भाषा का सहारा

इन बच्चियों के पठन-पाठन के लिए शिक्षा विभाग द्वारा विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। शिक्षक यशवंत कुमार सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज), दृश्यात्मक साधनों और विशेष शिक्षण तकनीकों के जरिए इन बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। इसके अलावा वार्डन प्रीति कुमारी, शिक्षिका संजू कुमारी और रीना देवी इन बच्चियों के शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं।

आत्मविश्वास और सहभागिता: शुरुआती दौर में भाषा और संवाद की कठिनाइयों से जूझने वाली ये बेटियां अब पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। जिला स्तर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी इन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनने की पहल: विद्यालय में आठवीं तक की औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चियों को सिलाई-कढ़ाई और ब्यूटीशियन जैसे वोकेशनल कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे विद्यालय से निकलने के बाद समाज में आत्मनिर्भर बन सकें।

मां जैसी ममता और देखभाल: वार्डन प्रीति कुमारी इन बच्चियों के साथ सिर्फ प्रशासक के रूप में नहीं, बल्कि एक अभिभावक की तरह जुड़ी हैं। उनकी देखरेख में इन बच्चियों का रहन-सहन और तौर-तरीके सामान्य बच्चों जैसे ही विकसित हो चुके हैं।

खामोश होंठों और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ रही इन बेटियों की कहानी समाज को यह मजबूत संदेश दे रही है कि यदि उचित अवसर और आत्मीय सहयोग मिले, तो किसी भी प्रकार की शारीरिक बाधा सपनों की उड़ान में रुकावट नहीं बन सकती।

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