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खगड़िया

माथार दियारा में गंगा कटाव रोकने की उठी मांग, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने DM को सौंपा ज्ञापन

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लाइव खगड़िया : जिले के माथार दियारा क्षेत्र में गंगा नदी से हो रहे भीषण कटाव की समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है। इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर आज सामाजिक कार्यकर्ताओं और जन प्रतिनिधियों का एक संयुक्त शिष्टमंडल जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात की और एक स्मार पत्र सौंपकर अविलंब सार्थक पहल करने का आग्रह किया।

प्रमुख प्रतिनिधियों की मौजूदगी

इस शिष्टमंडल का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार, नागेंद्र सिंह त्यागी और पूर्व जिला परिषद सदस्य कृष्ण कुमार मुन्ना ने किया। प्रतिनिधिमंडल में खगड़िया, बेगूसराय और मुंगेर जिले की पांच पंचायतों के प्रतिनिधि शामिल थे। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से:

  • ​जितेंद्र यादव (पैक्स अध्यक्ष), संजय यादव (पूर्व मुखिया), मक्खन शाह, प्रद्युमन सिंह।
  • ​सुमित चौधरी, मुकेश यादव, मौसम कुमार गोलू, अरुण यादव, मनोज यादव।
  • ​उमेश यादव, आमोद यादव, घनश्याम कुमार, नागेश्वर यादव, रमाकांत दास।
  • विजय कुमार, राकेश पासवान शास्त्री, बबलू यादव, वीर प्रकाश यादव और सदानंद यादव सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल थे।

जिलाधिकारी का रुख: “स्थायी समाधान के लिए चाहिए बड़ा बजट”

बताया जाता है कि जिलाधिकारी ने शिष्टमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रशासन इस समस्या से भली-भांति अवगत है। उन्होंने बताया कि:

  1. पूर्व की कार्रवाई: इस मुद्दे से राज्य सरकार को पहले ही अवगत कराया जा चुका है, जिसके बाद एक तकनीकी जांच टीम ने कटाव स्थल का निरीक्षण भी किया था।
  2. बड़ा वित्तीय बोझ: तकनीकी टीम की रिपोर्ट के अनुसार, इस कटाव का स्थायी समाधान बेहद खर्चीला है। इसमें लगभग 1,000 से 2,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
  3. अधिकार क्षेत्र की सीमा: जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि मामला 80-90 लाख रुपये तक का होता, तो जिला प्रशासन अपने स्तर से इसे हल कर सकता था। इतनी बड़ी राशि का प्रावधान केवल राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से ही संभव है।

बताया जाता है कि जिलाधिकारी ने शिष्टमंडल से कहा कि “आप में से कई लोग वर्तमान सरकार से जुड़े हैं, इसलिए सरकार के स्तर पर अपने माध्यम से भी प्रयास तेज करें। जिलाधिकारी के स्तर से मैं पुनः आपके आवेदन के आलोक में सरकार को विस्तृत जानकारी भेज दूंगा”। इधर प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पांच पंचायतों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। प्रशासन के आश्वासन के बाद अब प्रतिनिधियों ने सरकार के शीर्ष स्तर पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की है।

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