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नहाय खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व ‘छठ’ शुरू

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया. शुक्रवार को भी विभिन्न गंगा तट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. चार दिवसीय महापर्व के प्रथम दिन वर्तियों ने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण किया. जिसे आमतौर पर नहाय खाय कहा जाता है. इस दिन खाने में कद्दू, दाल और अरवा चावल का उपयोग किया गया. इस क्रम में जदयू के पूर्व विधायक पूनम देवी यादव ने भी प्रातः गंगा स्नान करने के उपरांत शुद्धता के साथ पूजा का प्रसाद के लिए गेहूं को कुट-छांटकर सुखाई. जिसके बाद उन्होंने भी कद्दू भात प्रसाद के रूप में ग्रहण किया. इधर छठ पूजा को लेकर जिले में भक्तिमय माहौल है और बाजार पूजन सामग्री से अटा पड़ा है. जहां काफी भीड़ देखी जा रही है.

दिख रही सादगी एवं पवित्रता की अनुपम छटा

छठ पूजा का सबसे महत्त्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी, पवित्रता और लोकपक्ष है. भक्ति और आध्यात्म से परिपूर्ण इस पर्व में बांस निर्मित सूप, टोकरी, मिट्टी के बर्त्तनों, गन्ने का रस, गुड़, चावल और गेहूं से निर्मित प्रसाद और सुमधुर लोकगीतों से युक्त होकर लोक जीवन की भरपूर मिठास का प्रसार होता है. शास्त्रों से अलग यह जन सामान्य द्वारा अपने रीति-रिवाजों के रंगों में गढ़ी गयी उपासना पद्धति है. जिसके केंद्र में वेद, पुराण जैसे धर्मग्रन्थ न होकर किसान और ग्रामीण जीवन है. इस व्रत के लिए ना तो विशेष धन की आवश्यकता है और ना ही पुरोहित या गुरु के अभ्यर्थना की. जरूरत पड़ती है तो पास-पड़ोस के सहयोग की, जो सेवा के लिए सहर्ष और कृतज्ञतापूर्वक तैयार रहते हैं. इस उत्सव के लिए जनता स्वयं अपने सामूहिक अभियान संगठित करती है. नगरों की सफाई, व्रतियों के गुजरने वाले रास्तों का प्रबन्धन, तालाब या नदी किनारे अर्घ्य दान की उपयुक्त व्यवस्था के लिए समाज सरकार के सहायता की राह नहीं देखता है. इस उत्सव में खरना के उत्सव से लेकर अर्ध्यदान तक समाज की अनिवार्य उपस्थिति बनी रहती है. जो सामान्य और गरीब जनता के अपने दैनिक जीवन की मुश्किलों को भुलाकर सेवा-भाव और भक्ति-भाव से किये गये सामूहिक कर्म का विराट और भव्य प्रदर्शन करता है.

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