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रक्षाबंधन 11 या 12 अगस्त को ? पूर्णिमा के दिन भद्रा का संयोग बना रहा असमंजस की स्थिति

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाने की परंपरा है. लेकिन इस बार रक्षाबंधन की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है. कुछ लोग 11 अगस्त को रक्षाबंधन बता रहे हैं. जबकि कुछ 12 अगस्त को त्योहार होने का दावा कर रहे हैं.

पंचांग के अलग-अलग मत

भाई-बहनों का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन इस बार दो दिन मनाएं जाने की बात कही जा रही है. इस पर्व को लेकर पंचांग का भी एक मत नहीं है. पूर्णिमा के दिन भद्रा की मौजूदगी इसका मुख्य कारण बन रहा है. हृषिकेश पंचांग के अनुसार 11 अगस्त (गुरुवार) की रात 08:25 बजे भद्रा की समाप्ति के बाद राखी बांधी जायेगी. बनारसी पंचांग के मुताबिक 11 अगस्त की रात लगभग साढ़े आठ बजे भद्रा के खत्म होने से लेकर अगले दिन शुक्रवार को सुबह 07:16 बजे तक पूर्णिमा तिथि की उपस्थिति में रक्षाबंधन शुभ होगा. जबकि पंडितों की मानें तो रात्रि में रक्षा बंधन कार्य नहीं करना चाहिए. वहीं मिथिला पंचांग के आधार पर 12 अगस्त (शुक्रवार) को बहन अपने भाई को राखी बांधेगी.

इधर कन्हैयाचक गांव निवासी आचार्य विजय झा व संसारपुर गांव निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर ने बताया है कि मिथिला पंचांग के मुताबिक गुरुवार 11 अगस्त को सुबह 09:42 बजे से पूर्णिमा आरम्भ हो रहा है. किन्तु यह वक्त भद्रा से युक्त है. जबकि 12 अगस्त को भद्रा नहीं है. लेकिन पूर्णिमा सुबह 07:16 बजे तक ही है. ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए इस दिन भी रक्षाबंधन मनाया जाएगा. आचार्य विजय झा की मानें तो शुक्ल पक्ष में जिस तिथि में सुर्योदय हो उस तिथि में व्रत, उत्सव ग्रहण करना चाहिए तथा कृष्ण पक्ष में जिस तिथि में सूर्यास्त हो उस तिथि में व्रत, उत्सव ग्रहण करना चाहिए. इस साल रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्रा का साया है और 11 अगस्त यानी रक्षाबंधन के दिन रात 8.25 बजे तक भद्रा का साया रहेगा. भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है. खजरैठा गांव निवासी डॉ मनोज कुंवर की मानें तो भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने का कोई भी वक्त अशुभ नहीं माना जाता है. परन्तु भाई की दीर्घायु और खुशियों की कामना एक शुभ मुहूर्त में की जाए तो बेहतर होता है. ऐसे में इस वर्ष रक्षाबंधन त्योहार 12 अगस्त को मनाया जाएगा.

शास्त्रों में भी उल्लेखित है रक्षा बंधन


डॉ मनोज कुंवर एवं पंडित अजय कांत ठाकुर ने बताया है कि सनातन परम्परा से किसी भी शुभ कार्य या अनुष्ठान की पूर्णाहुति बिना रक्षा बांधे पुरी नहीं होती है. हाथों में धागे लपेटने के पीछे मान्यता है कि इससे उनका परिवार धन-धान्य रहे. महाभारत में रक्षा बंधन पर्व का उल्लेख किया गया है. जब युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि संकट से कैसे पार हो सकते हैं, तब कृष्णा ने सेना की रक्षा के लिए राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थीं. शिशुपाल का वध करते समय कृष्ण के तर्जनी में चोट आ गई तो द्रौपती ने लहू रोकने के लिए अपनी साड़ी फाडकर उनकी अंगुली पर बांध दी थी.

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