लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : बिहार विधान परिषद के पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रत्याशी डॉ. संजीव कुमार की शानदार जीत का जश्न परबत्ता में भी धूमधाम से मनाया गया। मंगलवार को मतगणना के दौरान जैसे-जैसे उनकी बढ़त की खबरें सामने आती गईं, समर्थकों का उत्साह परवान चढ़ता गया। जीत की आधिकारिक घोषणा के साथ ही परबत्ता क्षेत्र में आतिशबाजी शुरू हो गई और लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
इस जीत के बीच सबसे अधिक चर्चा डॉ. संजीव कुमार के उस तीखे बयान की हो रही है, जिसने परबत्ता की सियासत में नई सरगर्मी पैदा कर दी है— “पटना अभी झांकी है, परबत्ता अभी बाकी है।”
एनडीए के दिग्गज को हराकर दर्ज की ऐतिहासिक जीत
इस चुनावी सफलता को केवल एक निर्वाचन क्षेत्र की जीत के रूप में नहीं, बल्कि डॉ. संजीव कुमार की राजनीतिक वापसी के एक नए और मजबूत अध्याय के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने एनडीए समर्थित प्रत्याशी प्रो. नवल किशोर यादव के तीन दशक पुराने राजनीतिक दबदबे को कड़ी चुनौती देते हुए यह सीट अपने नाम की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत उनकी व्यक्तिगत मेहनत और सटीक चुनावी रणनीति का परिणाम है।
विधानसभा की हार के बाद बदली रणनीति
डॉ. संजीव कुमार का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उनके पिता आरएन सिंह पांच बार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2020 में डॉ. संजीव ने जदयू के टिकट पर परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। हालांकि, वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी के तौर पर उन्हें लोजपा (रामविलास) के बाबूलाल शौर्य के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया था। लेकिन, उन्होंने हार से निराश होने के बजाय अपनी रणनीति में बदलाव किया और पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतरने का फैसला किया। लगातार जनसंपर्क, जमीनी मेहनत और कुशल रणनीति के दम पर मिली इस जीत ने आलोचकों को भी उनकी सक्रियता और क्षमता का लोहा मानने पर मजबूर कर दिया है।
बयान ने बढ़ाई राजनीतिकगर्मी, परबत्ता की अगली पारी पर टिकी निगाहें
जीत के बाद डॉ. संजीव कुमार का चर्चित बयान “पटना अभी झांकी है, परबत्ता अभी बाकी है” अब राजनीतिक गलियारों के केंद्र में आ गया है। उनके समर्थक इसे भविष्य की बड़ी राजनीतिक संभावनाओं और परबत्ता में एक नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।
फिलहाल, परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधियों (भाजपा, लोजपा (रामविलास), राजद और कांग्रेस) की मौजूदगी पहले से ही क्षेत्र की राजनीति को बहुदलीय स्वरूप दे रही है। ऐसे में डॉ. संजीव की इस ताजा जीत और उनके आक्रामक तेवर ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि पटना की इस जीत और उनके इस चर्चित बयान का परबत्ता की आगामी राजनीति पर कितना और क्या प्रभाव पड़ता है।






