लाइव खगड़िया : 6 जून 1981 की वह मनहूस शाम जब सैकड़ों लोग एक साथ काल के गाल में समा गये थे. यह ही वो तारीख थी जब मानसी-सहरसा रेल खंड के बदलाघाट के रेल पुल पर से 416 नंबर के डाउन सवारी गाड़ी की नौ में से सात डब्बे दुर्घटनाग्रस्त हो बागमती नदी की तेज धार में समा गए थे. तेज आंधी और बारिश भरी वो शाम यात्रियों की चीख-पुकार से सिहर उठा था. समस्तीपुर से बनमनखी जा रही उस सवारी गाड़ी के सात डिब्बों का आजतक पता नहीं चल पाया है. इससे सहज ही स्थिति की भयावता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
बताया जाता है कि देश के इस बड़े रेल हादसे में करीब 800 लोगों की मौत हुई थी. ट्रेन में काफी भीड़ थी और वह अपनी रफ्तार में दौड़ी चली जा रही थी. हर एक यात्री को अपने गंतव्य तक पहुंचने की जल्दी थी. लेकिन उन्हें जरा भी एहसास नहीं था कि उनके लिए यह यात्रा उनकी जिन्दगी का अंतिम यात्रा साबित होने वाली है. इसी बीच ड्राइवर ने किसी कारण से अचानक ब्रेक लगा दिया. जिससे ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उसके सात डिब्बे पुल की रेलिंग को तोड़ते हुए नदी में गिर गए.
हालांकि सरकारी आंकड़े के अनुसार हादसे में मरने वालों की संख्या 300 ही थी. लेकिन बाद में रेलवे के अधिकारियों ने जानकारी दी कि हादसे में करीब 800 से 1000 के करीब लोग मारे गए. शायद यही कारण रहा कि जब भी देश में कोई ऱेल हादसा होता है तो 6 जून 1981 के उस काले दिन की याद ताजा हो जाती है.
जिले के बदला घाट के 51 नंबर पुल पर हुआ यह हादसा उस वक्त देश की दूसरी बड़ी रेल दुर्घटना थी. हादसे के बाद तत्कालीन केन्द्रीय रेल मंत्री हेलीकॉप्टर से घटनास्थल पर पहुंच कर राहत व बचाव कार्यों का जायजा लिया था.
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