लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र): बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं किस कदर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ती हैं, इसका जीता-जागत नमूना परबत्ता प्रखंड के इंटर उच्च विद्यालय कन्हैयाचक के मैदान में देखने को मिल रहा है। यहाँ ‘मुख्यमंत्री खेल विकास योजना’ के तहत बनने वाला आउटडोर स्टेडियम 15 वर्षों के बाद भी खिलाड़ियों का इंतजार कर रहा है।
योजना संख्या 450/2009-10 के तहत इस स्टेडियम का निर्माण 11 मार्च 2010 को शुरू हुआ था। स्वीकृत आंकड़ों के अनुसार:
हैरानी की बात यह है कि कुल बजट का लगभग 90% हिस्सा निकाला जा चुका है, लेकिन धरातल पर काम आज भी अधूरा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने राशि निकासी में तो तत्परता दिखाई, लेकिन निर्माण कार्य को बीच में ही छोड़ दिया।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल ‘पारदर्शिता’ पर खड़ा होता है। न तो कार्य स्थल पर कोई बोर्ड लगा है और न ही सरकारी अभिलेखों में स्पष्ट तौर पर कार्य एजेंसी का नाम दर्ज है। आखिर इतनी बड़ी राशि किसे भुगतान की गई और काम अधूरा रहने पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
”स्टेडियम का कार्य अधूरा है। मैंने कई बार लिखित रूप में संबंधित मंत्री को अवगत कराया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि कार्य हर हाल में पूरा कराया जाएगा।”
— डॉ. संजीव कुमार (पूर्व विधायक, परबत्ता)
”15 वर्षों तक एक स्टेडियम का पूर्ण न होना भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। इस मामले में संबंधित विभाग को कड़ी कार्रवाई हेतु पत्र लिखा जाएगा।”
— बाबूलाल शौर्य (विधायक, परबत्ता)
स्थानीय युवाओं और खेल प्रेमियों का कहना है कि स्टेडियम की कमी के कारण वे अपनी प्रतिभा निखारने से वंचित हैं। क्षेत्र के लोगों ने अब इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
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