संगीत का यह साधक कभी माथे पर साज लेकर मीलों चला करते थे पैदल

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : “पहर हस्ती ने मुझे पार उतरने न दिया…हम तो मरते थे,मुझे आपनों ने मरने न दिया…मेरे शेरो में रोनाईयां थी खूशबू की…इन गरीबी ने मुझे,मेरे फन को उभरने न दिया”… गजल … Continue reading संगीत का यह साधक कभी माथे पर साज लेकर मीलों चला करते थे पैदल