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सिनेस्टार को खींच ला रहा मां का प्यार,सुशांत सिंह राजपूत का कल मुंडन संस्कार




लाइव खगड़िया (मनीष/मुकेश) : शिशु का जब जन्म होता है तो उसका पहला रिश्ता मां से होता है और हो भी क्यूं नहीं…आखिर वो मां ही होती है जो शिशु को 9 माह अपनी कोख में रखने के बाद असहनीय पीड़ा सहते हुए उसे जन्म देती है. इन नौ महीनों में शिशु और मां के बीच एक अदृश्य प्यार भरा गहरा रिश्ता बन जाता है. जो रिश्ता जीवन पर्यन्त बना रहता है और एक-दूसरे का साथ छूटने के बाद भी यह रिश्ता सदैव भावनाओं से जुड़ी रहती है. पूरी दुनिया में मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है और आज ही वो दिन है. यह भी एक सुखद संयोग है कि मातृ दिवस के ठीक अगले दिन अपनी मां की भावनाओं एवं अपनी संस्कृति का सम्मान करते हुए बॉलीवुड की चकाचौंध भरी जिन्दगी से अलग हटकर चर्चित सिनेस्टार सुशांत सिंह राजपूत खगड़िया पहुंच रहे है.

बताया जाता है कि वर्षों पूर्व उनकी मां उषा देवी ने जिले के चौथम प्रखंड के बोरने स्थित अतिप्राचीन मां मनसा देवी स्थान में मन्नत मांगी थी और मां की कृपा से मनोकामना पूर्ण होने पर सिनेस्टार सुशांत सिंह राजपूत इस भगवती स्थान में अपना मुंडन संस्कार कराने के लिए सोमवार को पहुंच रहे हैं. उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह राजपूत का बोरने ही ननिहाल है और वे स्वर्गीय महेश्वर प्रसाद सिंह के नाती एवं विरेन्द्र प्रसाद सिंह के भांजा हैं. हलांकि सुशांत सिंह राजपूत की मां अब इस दुनिया में नहीं हैं. लेकिन उनका अपनी मां के प्रति प्रेम व श्रद्धा ही उन्हें खगड़िया आने को शायद मजबूर कर गया है. जिसका उल्लेख उन्होंने अपने बड़े भाई विधायक नीरज कुमार बबलू के सहरसा स्थित आवास पर प्रवास के दौरान मदर्स डे के अवसर पर पूछे गये एक सवाल का जवाब देते हुए कर दिया कि ‘मेरे रोम-रोम में मां बसती है और आज मां नहीं है, लेकिन उनका आशीर्वाद हमेशा साथ है’. साथ ही उन्होंने कहा कि बीस साल बाद वे अपने घर आये हैं और इस बीस साल में एक पल भी ऐसा नहीं बीता जब मां व अपनी मातृभूमि की याद उन्हें नहीं आई हो.

चार सौ वर्ष पुराना रहा है मां मनसा देवी स्थान मंदिर का इतिहास

जिले के चौथम प्रखंड अंतर्गत बोरने स्थान के बागमती नदी तट पर अवस्थित मां मनसा देवी स्थान मंदिर चार सौ वर्ष पुराना है. आज भी इस मंदिर में दूर-दूर से लोग मन्नतें मांगने आते हैं और मुरादें पूरी होने पर दूध व लावा चढाया जाता है. यहां वर्ष में दो  बार नाग पंचमी एवं अगहन पंचमी में मेला लगता है. जिसमें श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है.

कहा जाता है कि चार सौ वर्ष पूर्व बागमती नदी में विलीन केवटा गांव के समीप नदी की उपधारा के बीच कुछ चरवाहों को माता का दर्शन हुआ और यह बातें गांव में फैलते ही स्थानीय लोगों के द्वारा मां की पूजा अर्चना की जाने लगी. मान्यताओं पर यदि विश्वास करें तो एक भक्त को स्वप्न आने के उपरांत बोरने के श्रद्धालुओं ने माता को बोरने गांव लाने की ठान ली.

जिसके बाद स्वप्न के अनुसार देवका गांव स्थित ऐतिहासिक माता भगवती मंदिर से हर कदम पर बलि दिया जाने लगा. इस क्रम में इलाके का छागर समाप्त हो जाने के बाद कद्दू व झिंगा का बलि दिया जाने लगा. कहा जाता है कि उस वक्त कद्दू व झिंगा से भी रक्त प्रवाह निकल रहा था. इसके उपरांत माता के मंदिर की स्थापना गांव के पश्चिम में की गई और मंदिर का गेट मां कात्यायनी मंदिर के सामने की ओर खोला गया. ग्रामीण बताते हैं कि गौतम वंश के द्वारा मंदिर की स्थापना किया गया था और आज भी उनके परिजनों के द्वारा पूजा-पाठ किया जा रहा है. इस मंदिर में पूजा-पाठ के लिए सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को विशेष दिन माना जाता है.

टीवी सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ से मिली सुशांत सिंह राजपूत को लोकप्रियता

सुशांत सिंह राजपूत के कैरियर की शुरुआत बैकअप डांसर के रूप में हुई थी और उन्होंने फिल्मफेयर अवार्डस में भी कई बार डांस किया. इसी क्रम में बालाजी टेलिफिल्म्स की कास्टिंग टीम ने उन्हें नोटिस किया और इसके बाद उनके करियर की शुरुआत ‘किस देश में है मेरा दिल’ नामक सीरियल से हुई.

लेकिन टीवी सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ. फिर डांस रियलिटी शो ‘जरा नच के दिखा 2’ और ‘झलक दिखला जा 4’ में उन्होंने भाग लिया. ‘झलक दिखला जा 4’ में उन्हें ‘मोस्ट कंसिस्टेंट परफॉर्मर’ का टाईटल मिला.जिसके बाद सुशांत ने फिल्मों की तरफ अपना रूख कर लिया और ‘काय पो चे’ फिल्म से अपना फिल्मी सफर शुरू किया.

आसान नहीं था बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाना

एक साधारण परिवार से आने वाले सुशांत सिंह राजपूत का कोई फिल्मी बैंकग्राउंड नही था. बाबजूद उन्होंने अपनी माता-पिता की इच्छा के बगैर ही फिल्मों को अपना करियर चुना और अपनी लगन व मेहनत से अपनी प्रतिभा को तराशते हुए इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम स्थापित करने में सफल रहे. इसके पूर्व एक वक्त ऐसा भी आया था जब उनके साथ अभिनेत्रियां काम तक नहीं करना चाहती थीं. इस क्रम में उनकी फिल्म ‘शुद्ध देसी रोमांस’ के लिए परिणीति चोपड़ा को साइन करने में काफी वक्त लग गया था.




सुशांत सिंह राजपूत पढाई में भी अव्वल थे और वे कई परीक्षाओं में भी सफल रहे. लेकिन इंजीनियरिंग से अलग अपने जुनून को पूरा करने के लिए उन्हें फिल्मों में ही अपना करियर बनाना था. इसलिए वे पहले दिल्ली और फिर मुंबई का रूख कर लिया. मुंबई आने के बाद उन्होंने उस डांस ग्रुप के साथ भी काम किया जिसको मशहूर कोरियोग्राफर ऐश्ले लोबो ने प्रशिक्षित किया था. उन्होंने मशहूर एक्शन डायरेक्टर अलन अमीन से मार्शल आर्ट भी सीखा और फिर वे सफलता की बुलंदियों को छूते गये. ‘काय पो चे’, ‘शुद्ध देसी रोमांस’, ‘पीके’, एमएस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी’ आदि उनकी चर्चित फिल्में रही हैं.

सुशांत सिंह राजपूत मूल रूप से हैं पूर्णिया के मल्डीहा के निवासी

सिनेस्टार सुशांत सिंह राजपूत का पैतृक गांव पूर्णिया जिले के मल्डीहा है. उनके पिता सरकारी अधिकारी हैं. जबकि उनका परिवार वर्ष 2000 में दिल्ली में आकर बस गया. चार बहनों और एक भाई में सुशांत की एक बहन मीतू सिंह राजस्थान के राज्य स्तरीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी हैं. सुशांत सिंह राजपूत ने अपनी आरंभिक शिक्षा सेंट कैरेंस हाई स्कूल पटना से पूरा किया. जबकि आगे की पढाई उन्होंने दिल्ली के कुलाची हंसराज मॉडल स्कूल से किया. जिसके उपरांत उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढाई दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से पूरी की.


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