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श्री श्री 108 शत् चंडी महायज्ञ के अंतिम दिन श्रीराम-केवट मिलन पर चर्चा




लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) :  जिले के श्रद्धालुओं से अटी पड़ी सहरसा जिले के सोनबर्षा राज प्रखंड के विराटपुर पंचायत के प्रसिद्ध श्री माता चंडिका स्थान विराटपुर के प्रांगण में आयोजित पांच दिवसीय श्री श्री 108 शत् चंडी महायज्ञ के पांचवे दिन एवं कथा के चौथे दिन कथा व्यास परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने अपने कोकिल कंठ से भगवान श्रीराम-केवट मिलन, राज्याभिषेक पर विस्तारपूर्वक चर्चा किया.

वहीं स्वामी जी ने राम केवट मिलन प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम गंगा पार करने के लिए केवट से नाव मांगते हैं, लेकिन केवट नाव लेकर नहीं आता है.केवट श्रीराम से कहता है कि मैंने तुम्हारा भेद जान लिया है, सभी लोग कहते हैं कि तुम्हारे पैरों की धूल से एक पत्थर सुंदर स्त्री बन गई थी.मेरी नाव तो लकड़ी की है, कहीं इस नाव पर तुम्हारे पैर पड़ते ही ये भी स्त्री बन गई तो,मैं लुट जाऊंगा.यही नाव मेरे परिवार का भरणपोषण करती है.केवट भगवान श्रीराम से कहता है, पहले मुझे तुम्हारे पैर पखारने दो ( पैर धोने), उसके बाद मैं नाव से तुम्हें गंगा पार करा दूंगा.

जब केवट ने भगवान श्रीराम के पैर पखारने की बात कही तो श्रीराम भी राजी हो गए और फिर केवट ने श्रीराम के पैर धोए.इसके बाद केवट ने श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और निषादराज को अपनी नाव में बैठाकर गंगा नदी पार करा दी.गंगा नदी के दूसरे किनारे पर पहुंचकर श्रीराम और सभी नाव से उतर गए, तब श्रीराम के मन में कुछ संकोच हुआ.जब सीता ने श्रीराम के चेहरे पर संकोच के भाव देखे तो सीता ने तुरंत ही अपनी अंगूठी उतारकर उस केवट को भेंट स्वरूप देनी चाही, लेकिन केवट ने अंगूठी नहीं ली. केवट ने कहा कि वनवास पूर्ण करने के बाद लौटते समय आप मुझे जो भी देंगे मैं उसे प्रसाद स्वरूप स्वीकार कर लूंगा.





स्वामी जी ने श्री राम राज्याभिषेक पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में भगवान श्रीराम की महिमा अपार है.रावण का संहार कर भगवान श्रीराम ने धर्म संस्कृति की स्थापना किया.वहीं आकाशवाणी से जुड़े संगीत कलाकारों ने अपनी भक्ति संगीत से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया.



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