Breaking News
Home / Recent / खगड़िया के तबला वादक ने दिया था फिल्म ‘शोले’ में ‘बसंती’ की ‘धन्नो’ को टाप की आवाज

खगड़िया के तबला वादक ने दिया था फिल्म ‘शोले’ में ‘बसंती’ की ‘धन्नो’ को टाप की आवाज

लाइव खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : “चल धन्नो…आज तेरी बसंती के इज्ज का वाल है“…याद है ना 1970 के दशक के सुपर-डुपर हिट फिल्म ‘शोले’ का यह चर्चित डायलॉग…यदि अब भी याद नहीं आया तो जरा यादों के झरोखें से फिल्म के उस सीन को देख लें…

देखें ‘शोले’ फिल्म के उस सीन की कुछ तस्वीरें :

बावजूद इसके माथे पर बल पड़ रहा है तो फिल्म के इस सीन का वीडियो क्लिप ही देंख लें.लेकिन हां…बसंती के तांगे में लगी धन्नो की टाप से तबले की थाप की आती आवाज पर जरा विशेष गौर कर लेंगे…

फिल्म ‘शोले’ के उस सीन का वीडियो क्लिप भी देख लें :

तबले की यह थाप इस सीन में बसंती के धन्नो की टाप में जान डाल गया था.लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस सीन में तबले पर संगत देने वाले कलाकार खगड़िया के ही थे.जी हां…जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत खीराडीह गांव निवासी  प्रसिद्ध तबला वादक एवं कत्थक नृत्य में अपनी पकड़ रखने वाले पंडित राजेन्द्र महाराज के दावे को यदि मानें तो भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक “शोले’ के इस सीन में बसंती के तांगे में लगी धन्नो के टाप की आवाज को उन्होंने ही लयबद्ध किया था.

बताया जाता है कि उस वक्त फिल्म के डायरेक्टर ने पंडित राजेन्द्र महाराज को तबला वादन सम्राट की उपाधि देते हुए  51 हजार रुपये से सम्मानित भी किया था.अपने पिता की विरासत को बरकरार रखने वाले तबला वादक पंडित राजेन्द्र महाराज, दिल्ली, बनारस, कलकत्ता, लखनऊ, इलाहाबाद सहित देश के विभिन्न बड़े शहरों में प्रसिद्ध गायक-गायिका  गिरजा देवी, पंकज उदास, पंडित चन्द्रशेखर, सियाराम तिवारी, अमरनाथ परशुनाथ, बलराम पाठक आदि के साथ मंच साझा कर तबला वादन से लोगों का दिल जीत चुके है.इसी क्रम में कोलकता के एक कार्यक्रम में  पंडित राजेन्द्र महाराज के तबला वादन की धुन पर प्रसिद्ध कत्थक नृतांगणा उर्मिला नागर , सुलेखा मुखर्जी, माया मुखर्जी आदि ने भी अपनी-अपनी प्रस्तुति दी है.दर्जनो पुरस्कार से सम्मानित तबला वादक सम्राट पंडित राजेन्द्र का जन्म वर्ष 1955 में जिले के खीराडीह गांव में हुआ.उनके पिता स्वर्गीय परमेश्वर महाराज देश के सुप्रसिद्ध तबला वादक के रुप में उस वक्त जाने जाते थे.जबकि उनके पुत्र पंडित राजेन्द्र महाराज का कहना है कि तबला वादन का प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने अपने पिताजी से ही प्राप्त किया था.पिता के देहांत के बाद बनारस में सुप्रसिद्ध तबला वादक पंडित किशन महाराज से शिक्षा प्राप्त कर अपने आप को तबला वादन में समर्पित कर दिया.वहीं कत्थक नृत्य की शिक्षा उन्होंने दिल्ली में सुप्रसिद्ध कत्थक नर्तक वृजमोहन मिश्र उर्फ विरजू महाराज से प्राप्त किया.एक दशक पूर्व मुंगेर के योग विद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे.अब्दुल कलाम ने उनके तबला वादन से खुश होकर 51 हजार रूपये का पुरस्कार दिया था.वहीं पुरस्कार के रूप में ही मुंगेर के तत्कालीन जिलाधिकारी गौतम गोस्वामी के द्वारा भी एक लाख रुपये की राशी दी गई थी.साथ ही उन्हें मौखिक तौर पर तबले का जादूगर की उपाधि से भी सम्मानित किया गया था.इसके अतिरिक्त भी वो कई पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित हो चुके हैं.

उम्र के एक पडा़व पर आकर आज वो स्थानीय श्रीरामपुर ठुठ्ठी स्थित एक प्राइवेट स्कूल में संगीत के शिक्षक के रूप में बच्चों को तबला वादन सीखा रहे है.

देखें पंडित राजेन्द्र महाराज की कुछ बेहद ही पूरानी तस्वीरें :

रोचक रही पंडित राजेन्द्र महाराज के तबले की थाप की आवाज का फिल्म ‘शोले’ में चयन

कहानी थोड़ी मार्मिक है लेकिन शायद यह ही जिन्दगी के सफर में संघर्ष की एक सच्चाई भी है.पिताजी की मृत्यु के बाद पंडित राजेन्द्र महाराज बनारस तबला सीखने के लिए देश के सुविख्यात तबला वादक पंडित किशन महाराज के पास बनारस पहुंचे.पंडित किशन महाराज का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए उन्हें तीन दिनों तक भूखे भी रहना पड़ा.चौथे दिन संयोगवश महाराज जी की नजर पंडित राजेन्द्र महाराज पर पड़ी और उन्होंने उनसे परिचय सहित यहां आने का उद्देश्य पूछा.पंडित राजेन्द्र महाराज द्वारा पिता का नाम बताये जाने एवं तबला वादन सीखने की जिज्ञासा प्रकट करने पर वो इसके लिए तैयार हो गये.इसके उपरांत पंडित राजेन्द्र महाराज वहां तीन वर्षों तक तबला वादन की शिक्षा ग्रहण किया.इसी क्रम में शोले फिल्म की टीम बनारस के तबला वादक पंडित किशन महाराज के पास पहुंची और बसंती के तांगे के धन्नो की टाप के लिए तबले की आवाज के लिए एप्रोच किया.इस दौरान वहां मौजूद कई तबला वादकों ने अपनी थाप टीम को सुनाई लेकिन वो उसे पसंद नहीं आया.लेकिन पंडित राजेन्द्र महाराज के तबले की थाप की आवाज उपस्थित फिल्मी टीम को इतना भा गया कि उसका चयन कर लिया गया.फिल्म के रिलीज होने के बाद तो बसंती के तांगे की धन्नो की वह टाप धूम ही मचा गई.



बहरहाल एक सुपर हिट फिल्म के पर्दे के पीछे के एक स्थानीय कलाकार पंडित राजेन्द्र महाराज आकाशवाणी भागलपुर से भी जुड़े हुए हैं.जबकि तबला वादन के क्षेत्र में सहरसा के बनगांव निवासी उनके एक शिष्य निरंजन ठाकुर बेगुसराय जिले में फिलहाल सी.ओ. के पद पर कार्यरत हैं.साथ ही मुंगेर जिले के उनके दो अन्य शिष्य राजन व उनका भाई साजन भी आकाशवाणी पटना व दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.पंडित राजेन्द्र महाराज के दिल में आज भी एक कसक है कि उनके इलाके का कोई युवा तबला वादक शीर्ष पर नहीं पहुंच पाया.जिनकी तलाश उनके द्वारा की जा रही है.वादन के क्षेत्र में एक मुकाम पर पहुंचने के बाद भी आज वो हर दिन सुबह करीब दो घंटे तक तबले पर अभ्यास करते हैं.



Check Also

अच्छी पहल : वर्षों पुरानी वर्चस्व की लड़ाई का आपसी सहमति से पटाक्षेप

लाइव खगड़िया : किसी भी समाज में हिंसा व तनाव से किसी समस्या का हल …